दिल्ली: गुजरात की राजधानी गांधीनगर हाल ही में एक ऐतिहासिक कूटनीतिक मंच बनी, जहाँ भारत और जर्मनी के बीच उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल वार्ता संपन्न हुई। इस बैठक ने न केवल दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती दी, बल्कि वैश्विक राजनीति में उनकी साझा भूमिका को भी रेखांकित किया।
गांधीनगर के प्रतिष्ठित महात्मा मंदिर में आयोजित इस वार्ता में भारतीय पक्ष का नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया, जबकि जर्मन प्रतिनिधिमंडल की कवाई चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने की। गौरतलब है कि चांसलर मर्ज़ की यह पहली आधिकारिक भारत यात्रा है, जो भारत के बढ़ते वैश्विक महत्व को दर्शाती है।
यह बैठक एक विशेष मील का पत्थर भी रही। भारत और जर्मनी की रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership) के हाल ही में 25 वर्ष पूरे हुए हैं। इन ढाई दशकों में दोनों देशों ने रक्षा, व्यापार, और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक-दूसरे का भरपूर सहयोग किया है। बैठक के दौरान इस साझेदारी में हुई प्रगति की समीक्षा की गई और भविष्य के लक्ष्यों पर चर्चा हुई।
वार्ता के मुख्य बिंदु:
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रणनीतिक सहयोग: दोनों देशों ने रक्षा और सुरक्षा संबंधों को और गहरा करने पर सहमति जताई।
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आर्थिक साझेदारी: व्यापारिक बाधाओं को दूर करने और निवेश बढ़ाने पर जोर दिया गया।
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तकनीकी विनिमय: नवीकरणीय ऊर्जा (Green Energy) और नवाचार (Innovation) के क्षेत्र में संयुक्त प्रयासों को गति देना।
गांधीनगर में हुई यह वार्ता यह स्पष्ट करती है कि भारत और जर्मनी न केवल आर्थिक भागीदार हैं, बल्कि दुनिया की बड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए एक-दूसरे के विश्वसनीय साथी भी हैं। चांसलर मर्ज़ की यह यात्रा आगामी दशकों के लिए सहयोग की नई नींव रखने वाली साबित होगी।