जानिए पहाड़ी लोग हर जगह क्यों करते हैं गोलू देवता की पूजा

उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में न्याय और मनोकामना पूर्ति के देवता के रूप में प्रसिद्ध गोलू देवता की पूजा इस क्षेत्र के ग्रामीण समाज में बड़े उत्साह के साथ की जाती है। विशेष रूप से ब्राह्मण और स्थानीय आदिवासी समुदाय उनके प्रमुख भक्त हैं। अल्मोड़ा के चितई गोलू देवता मंदिर, नैनीताल के घोड़ाखाल मंदिर और बिनसर के गैराड़ मंदिर प्रमुख तीर्थस्थल हैं, जहां भक्त घंटियां अर्पित करके अपनी समस्याओं और मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना करते हैं।गोलू देवता की तरह उत्तराखंड में अन्य स्थानीय देवताओं जैसे चिटई देवता, बाबा हरिदास और कालिका देवी की पूजा भी न्याय, सुरक्षा और कल्याण के प्रतीक के रूप में की जाती है। यह परंपरा स्थानीय समाज में सदियों से संरक्षित है और लोगों की आस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है।

गोलू देवता की पूजा करने वाला समाज

उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में गोलू देवता को विशेष रूप से क्षत्र, ब्राह्मण और ग्रामीण आदिवासी समुदाय के लोग पूजा करते हैं।

यह पूजा मुख्य रूप से ग्रामीण समाज और हिमालयी गांवों में प्रचलित है।
समाज का यह वर्ग गोलू देवता को न्याय और सत्य के देवता के रूप में मानता है।
लोग अपनी समस्याओं, विवाद और मनोकामनाओं के समाधान के लिए उनकी पूजा करते हैं।
विशेष अवसरों पर, जैसे विजयादशमी या नवरात्रि, गोलू देवता की पूजा और आयोजन बड़े पैमाने पर होती है।

गोलू देवता के प्रमुख मंदिर
उत्तराखंड में गोलू देवता के कई प्रमुख मंदिर हैं, जो भक्तों के लिए तीर्थस्थल के रूप में जाने जाते हैं।

 

चितई गोलू देवता मंदिर, अल्मोड़ा

यह मंदिर गोलू देवता का सबसे प्रमुख मंदिर माना जाता है।
यहां भक्त घंटियां अर्पित करते हैं और अपने मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए पत्र लिखकर मंदिर में अर्पित करते हैं।
घोड़ाखाल मंदिर, नैनीताल

यह मंदिर न्याय और समस्याओं के समाधान के लिए प्रसिद्ध है।
भक्त यहां न्याय की प्राप्ति और कष्टों से मुक्ति के लिए पूजा करते हैं।
गैराड़ गोलू देवता मंदिर, बिनसर

यह मंदिर प्राचीन और पारंपरिक मान्यता के अनुसार विशेष श्रद्धा का केंद्र है।
यहां श्रद्धालु विशेष अवसरों पर सफेद कपड़े और घंटियां अर्पित करते हैं।
गोलू देवता के समान अन्य देवता
गोलू देवता की तरह उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में कई अन्य देवताओं की पूजा भी की जाती है, जो न्याय, सुरक्षा और कल्याण के प्रतीक हैं।

 

बाबा हरिदास

 

न्याय और कष्ट निवारण के लिए पूजे जाते हैं।

 

चिटई देवता

 

कुमाऊं क्षेत्र के गांवों में विवाद और समाजिक समस्याओं के समाधान के लिए पूजे जाते हैं।

 

गौरी / कालिका देवी

 

सुरक्षा, शक्ति और समाज की रक्षा के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में पूजी जाती हैं।

 

गोलू देवता के स्थानीय रूप (जैसे गैराड़ गोलू, चितई गोलू)
ये स्थानीय स्तर पर न्याय और मनोकामना पूर्ति के देवता माने जाते हैं।
उनके मंदिरों में भक्त अपने पत्र, घंटियां और सफेद कपड़े अर्पित करते हैं।
पूजा की विशेषताएं
भक्त सफेद कपड़े और पगड़ी पहनकर पूजा करते हैं।
मंदिरों में घंटियां अर्पित करना और अपने समस्याओं के पत्र गोलू दरबार में देना मुख्य विधि है।
पूजा का उद्देश्य न्याय, मनोकामना पूर्ति और कष्ट निवारण है।
यह पूजा मुख्य रूप से ग्रामीण और पर्वतीय समाज में लोक परंपरा के रूप में संरक्षित है।

 

 

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