उत्तर प्रदेश: मथुरा के चर्चित आयुषी यादव हत्याकांड में कोर्ट ने करीब चार साल बाद बड़ा फैसला सुनाया है। बेटी की हत्या के मामले में उसके पिता नितेश यादव और मां ब्रजवाला को उम्रकैद की सजा दी गई है। कोर्ट ने अपराध को क्रूर और वीभत्स बताते हुए कहा कि दोषियों के प्रति नरमी बरतने का कोई न्यायोचित आधार नहीं है। दोनों पर जुर्माना भी लगाया गया है।
मामला नवंबर 2022 का है। दिल्ली के बदरपुर इलाके की रहने वाली 22 वर्षीय आयुषी BCA की छात्रा थी। उसने राजस्थान के भरतपुर निवासी छत्रपाल राजपूत से आर्य समाज मंदिर में प्रेम विवाह किया था। परिवार इस शादी से नाराज था।
17 नवंबर 2022 को घर में विवाद के बाद पिता ने लाइसेंसी रिवॉल्वर से आयुषी को गोली मार दी। गोली लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद शव को पॉलिथीन में पैक कर लाल रंग के सूटकेस में रखा गया। देर रात पिता अपनी कार से शव लेकर निकले और अगले दिन सुबह मथुरा के पास यमुना एक्सप्रेस-वे के किनारे सुनसान जगह पर सूटकेस फेंककर वापस दिल्ली लौट आए।
18 नवंबर को राहगीर की सूचना पर पुलिस ने सूटकेस बरामद किया। शव की पहचान के लिए पुलिस ने कई टीमें लगाईं और सैकड़ों CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली। बाद में मुखबिर की सूचना के आधार पर पुलिस आयुषी के घर पहुंची। उसकी मां और भाई ने पोस्टमॉर्टम हाउस में शव की पहचान की।
जांच के बाद पुलिस ने आयुषी के माता-पिता को गिरफ्तार किया और उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। कोर्ट में सरकारी पक्ष ने गवाहों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोप साबित किए। फैसले के दौरान पिता ने अपनी सफाई में कहा कि बेटी की हत्या उन्होंने की थी और उनकी पत्नी का इसमें दोष नहीं है।
कोर्ट ने दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई। नितेश यादव पर 7 हजार रुपये और ब्रजवाला पर 6 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इस फैसले ने एक बार फिर ऑनर किलिंग और परिवार की सोच के नाम पर की जाने वाली हिंसा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
