कक्षा 9 की नई इतिहास की किताब में बड़ा बदलाव, अब इतिहास पढ़ने का बदलेगा नजरिया

दिल्ली: कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए इतिहास और सामाजिक विज्ञान की नई किताब में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। नई किताब में भारतीय इतिहास के मध्यकालीन दौर को पहले की तुलना में अलग दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया गया है।

नई किताब में करीब 1000 से 1700 ईस्वी के बीच के भारतीय इतिहास में हुए संघर्ष, प्रतिरोध और विभिन्न क्षेत्रीय शक्तियों के योगदान पर विशेष जोर दिया गया है। इसमें राजपूतों, अहोमों, विजयनगर साम्राज्य, मराठों, सिखों और जाटों जैसे समूहों की भूमिका को विस्तार से सामने रखा गया है।

इसके साथ ही कई ऐसी ऐतिहासिक शख्सियतों और महिला योद्धाओं का भी उल्लेख किया गया है, जिनकी भूमिका को नई सामग्री में प्रमुखता दी गई है। महाराणा प्रताप, लाचित बरफुकन, रानी नायकी देवी और रानी अब्बक्का चौटा जैसे नामों के माध्यम से विद्यार्थियों को संघर्ष, साहस और प्रतिरोध की ऐतिहासिक घटनाओं से परिचित कराया गया है।

वहीं, पहले कक्षा 9 में पढ़ाए जाने वाले फ्रांसीसी क्रांति, यूरोप में समाजवाद और रूसी क्रांति तथा नाजीवाद के उदय जैसे विषयों की संरचना में भी बदलाव किया गया है। कुछ विषयों को दूसरे स्तर पर स्थानांतरित किया गया है, जबकि भारतीय इतिहास और सभ्यता से जुड़े हिस्सों को अधिक विस्तार दिया गया है।

नई किताब में इतिहास को केवल घटनाओं और तिथियों के रूप में नहीं, बल्कि भारतीय समाज, क्षेत्रीय शक्तियों, संघर्ष और सांस्कृतिक परंपराओं के संदर्भ में समझाने का प्रयास दिखाई देता है।

अब सवाल यही है कि इतिहास पढ़ाने के इस बदले हुए तरीके से विद्यार्थियों को अतीत को समझने में कितना नया दृष्टिकोण मिलेगा और आने वाले समय में इसका शैक्षणिक प्रभाव क्या होगा।

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