बिज़नेस : Tata Sons के इतिहास में पहली बार उसकी Annual General Meeting यानी AGM को कोरम पूरा न होने के कारण टालना पड़ा है। 18 अगस्त 2026 को होने वाली बैठक में जरूरी संख्या में शेयरधारक प्रतिनिधि मौजूद नहीं हो सके। इसकी सबसे बड़ी वजह Sir Ratan Tata Trust यानी SRTT से संयुक्त प्रतिनिधि का नामित न हो पाना बताया जा रहा है। महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर की ओर से SRTT की बैठकों पर लगी पाबंदी के कारण ट्रस्ट जरूरी प्रक्रिया पूरी नहीं कर सका।
Tata Sons के Articles of Association के मुताबिक AGM के लिए कम से कम पांच सदस्यों की मौजूदगी जरूरी है और इनमें Tata Trusts के दोनों प्रमुख ट्रस्टों की ओर से संयुक्त रूप से नामित प्रतिनिधि भी शामिल होना चाहिए। प्रतिनिधि की अनुपस्थिति में बैठक आगे नहीं बढ़ सकी और इसे स्थगित करना पड़ा।
इस घटनाक्रम का असर Tata Sons के तीन अहम फैसलों पर पड़ सकता है। पहला, कंपनी के वित्त वर्ष 2025-26 के खातों को मंजूरी और डिविडेंड से जुड़ा फैसला। दूसरा, Tata Sons के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के डायरेक्टर पद से दोबारा नियुक्ति का मुद्दा। चंद्रशेखरन पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि वे फरवरी 2027 के बाद चेयरमैन पद पर बने रहने के लिए उपलब्ध नहीं होंगे।
तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा Tata Group के भविष्य के नेतृत्व और उत्तराधिकारी की प्रक्रिया से जुड़ा है। Tata Trusts के पास Tata Sons में निर्णायक हिस्सेदारी है और ट्रस्ट की भूमिका नए चेयरमैन के चयन में बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ऐसे में AGM का टलना समूह के भीतर चल रहे गवर्नेंस और नेतृत्व संबंधी तनाव को और बढ़ा सकता है। अब बोर्ड को AGM की नई तारीख तय करनी होगी।
