लखनऊ, महोबा, हमीरपुर, आजमगढ़ और उन्नाव समेत उत्तर प्रदेश के कई जिलों में शिक्षण संस्थानों की अव्यवस्थाओं को लेकर छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बाद योगी सरकार एक्शन मोड में आ गई है।शिक्षकों की कमी, खराब व्यवस्थाओं और प्रशासनिक लापरवाही से जुड़ी शिकायतों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गंभीरता से लिया है। सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि शिक्षा व्यवस्था में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।मुख्यमंत्री के निर्देश पर मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों को नोडल अधिकारी बनाकर विभिन्न शिक्षण संस्थानों की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अब प्रदेश के स्कूलों, कॉलेजों और अन्य शिक्षण संस्थानों की व्यवस्थाओं पर सीधे नजर रखी जाएगी।
बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा, उच्च शिक्षा, तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा, समाज कल्याण और श्रम विभाग के अंतर्गत आने वाले संस्थानों की अलग-अलग अधिकारियों के जरिए मॉनिटरिंग की जाएगी।जहां भी शिक्षकों की कमी, प्रशासनिक खामी या किसी अन्य तरह की शिकायत सामने आएगी, उसके तत्काल समाधान के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों को चिह्नित कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
छात्रों के प्रदर्शन के बाद सरकार अब यह भी नजर रख रही है कि विरोध प्रदर्शनों और उनसे जुड़ी गतिविधियों को लेकर सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर किस तरह की सामग्री प्रसारित की जा रही है। खास तौर पर यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय लोगों की गतिविधियों पर भी पैनी नजर रखे जाने की बात सामने आई है।कुल मिलाकर, छात्रों के लगातार प्रदर्शन के बाद योगी सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपना लिया है। अब देखना होगा कि जमीनी स्तर पर शिक्षकों की कमी और दूसरी समस्याओं का समाधान कितनी तेजी से होता है और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कब कार्रवाई होती है।
