शाह बोले- देश कोई धर्मशाला नहीं: घुसपैठिए भारत की सुरक्षा के लिए खतरा

देश : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अवैध घुसपैठ को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि भारत कोई धर्मशाला नहीं है और देश में रहने का अधिकार केवल उसके नागरिकों को होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अवैध तरीके से देश में प्रवेश करने वाले लोग सिर्फ कानून व्यवस्था ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी गंभीर चुनौती पैदा कर सकते हैं।

अमित शाह ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक और संवैधानिक देश है, जहां नागरिकों को अधिकारों के साथ-साथ सुरक्षा और सम्मान की गारंटी दी जाती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कोई भी व्यक्ति अवैध तरीके से सीमा पार कर देश में प्रवेश करे और यहां के संसाधनों पर अधिकार जताने लगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश की सीमाओं की सुरक्षा और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

गृह मंत्री के मुताबिक, अवैध घुसपैठ से देश की आंतरिक सुरक्षा, जनसंख्या संतुलन और सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिति प्रभावित हो सकती है। ऐसे मामलों में कुछ घुसपैठियों के आपराधिक गतिविधियों या देश विरोधी नेटवर्क से जुड़े होने की आशंका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसलिए सरकार घुसपैठ की पहचान करने और उसे रोकने के लिए लगातार कदम उठा रही है।

उन्होंने कहा कि भारत मानवीय मूल्यों का सम्मान करता है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। देश के नागरिकों के अधिकार सर्वोपरि हैं और सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि अवैध घुसपैठ पर प्रभावी कार्रवाई हो।

अमित शाह के इस बयान के बाद देश में नागरिकता, सीमा सुरक्षा और घुसपैठ को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि भारत में कानून के अनुसार रहने वालों का स्वागत है, लेकिन अवैध तरीके से देश में प्रवेश करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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