उत्तर प्रदेश: लखनऊ के अलीगंज में 22 जून को हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। एक अवैध इमारत में संचालित लर्निंग स्पेस लाइब्रेरी और कोचिंग सेंटर में लगी आग ने 15 छात्रों की जिंदगी छीन ली। इस दर्दनाक हादसे के बाद छात्रों और अभिभावकों के बीच भय और असुरक्षा का माहौल है, जबकि प्रशासन ने बड़े स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी है।
हादसे के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण और फायर विभाग ने संयुक्त अभियान चलाते हुए शहर की 16 बड़ी कोचिंग संस्थाओं पर कार्रवाई की है। इनमें एलन और ग्रेविटी जैसे नाम भी शामिल हैं। अब तक कुल 71 भवनों और प्रतिष्ठानों को सील किया जा चुका है, जबकि 83 भवन मालिकों और संचालकों को नोटिस जारी किए गए हैं। प्रशासनिक सख्ती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई कोचिंग संचालक कार्रवाई की खबर मिलते ही अपने संस्थान बंद कर मौके से गायब हो गए।
इस बीच छात्रों की चिंता लगातार बढ़ रही है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हजारों छात्रों के सामने अब पढ़ाई जारी रखने का संकट खड़ा हो गया है। नेशनल पीजी कॉलेज के छात्र आशंकित का कहना है कि इस हादसे के बाद कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं और अब किसी भी नए संस्थान में दाखिला लेने से पहले कई बार सोचना पड़ रहा है।
प्रशासन ने हादसे के लिए जिम्मेदार मानी जा रही रामेश्वरम इंस्टीट्यूट की बिल्डिंग को 7 जुलाई को ध्वस्त करने का फैसला लिया है। भवन मालिक वीरेंद्र शुक्ला समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं LDA के छह अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है और 18 अन्य अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार ने पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय को भेज दी है। यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी का ऐसा उदाहरण बन गया है जिसने छात्रों की सुरक्षा और शिक्षा व्यवस्था दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
