Delhi: अगर आप आने वाले दिनों में हवाई यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो आपकी जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। ग्लोबल कंसल्टिंग फर्म मैकिंजी की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में बढ़ते जियो-पॉलिटिकल तनाव और जेट फ्यूल की सप्लाई में आई कमी के कारण हवाई सफर 25 प्रतिशत तक महंगा हो सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि किसी भी हवाई टिकट की कीमत में लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा केवल ईंधन लागत का होता है। ऐसे में जेट फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर यात्रियों द्वारा चुकाए जाने वाले किराए पर पड़ेगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, कच्चे तेल और उससे बनने वाले ईंधन उत्पादों के बीच मूल्य अंतर यानी क्रैक स्प्रेड में बड़ी वृद्धि देखने को मिल सकती है। जहां यह सामान्यतः 20 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहता है, वहीं 2026 में इसके 50 डॉलर प्रति बैरल से अधिक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है।
खाड़ी देशों और एशिया की कई प्रमुख रिफाइनरियों में उत्पादन घटने से वैश्विक बाजार में जेट फ्यूल की उपलब्धता प्रभावित हुई है। भारत, चीन और दक्षिण कोरिया जैसे देशों द्वारा ईंधन निर्यात पर आंशिक प्रतिबंध लगाने से भी सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ा है। दूसरी ओर, कई बड़ी रिफाइनरियां पहले से ही अपनी अधिकतम क्षमता पर काम कर रही हैं, जिससे उत्पादन बढ़ाने की संभावनाएं सीमित हो गई हैं।
हालांकि, कुछ राहत की उम्मीद भी दिखाई दे रही है। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और हॉर्मुज जलमार्ग से तेल टैंकरों की आवाजाही सामान्य होने के कारण कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। ब्रेंट क्रूड की कीमत घटकर 75.55 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है, जो हाल के उच्चतम स्तर से करीब 37 प्रतिशत कम है।
फिलहाल विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक ईंधन आपूर्ति पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाती, तब तक हवाई किरायों में उतार-चढ़ाव और बढ़ोतरी की संभावना बनी रहेगी।
