राजस्थान: जैसलमेर जिले के बीचों-बीच बसा कुलधरा… एक ऐसा गांव, जो पिछले करीब 200 वर्षों से वीरान है। टूटे हुए मकान, सुनसान गलियां और चारों ओर फैला सन्नाटा आज भी इस जगह को रहस्य से भर देता है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि एक समृद्ध और खुशहाल गांव एक ही रात में हमेशा के लिए खाली हो गया?
इतिहास के अनुसार, कुलधरा की स्थापना 13वीं शताब्दी में पालीवाल ब्राह्मणों ने की थी। अपनी बुद्धिमत्ता और जल संरक्षण की अनोखी तकनीकों के कारण उन्होंने थार के रेगिस्तान में भी समृद्ध खेती विकसित की। कुलधरा के आसपास ऐसे 84 गांव बसे हुए थे।
लेकिन 19वीं सदी की शुरुआत में जैसलमेर रियासत के शक्तिशाली दीवान सालम सिंह की बुरी नजर गांव के मुखिया की बेटी पर पड़ी। उसने विवाह का दबाव बनाया और इंकार करने पर भारी कर तथा विनाश की धमकी दी।
गांव के सम्मान और बेटी की अस्मिता की रक्षा के लिए कुलधरा और आसपास के 84 गांवों के पंचों ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया। कहते हैं कि एक ही रात में हजारों लोग अपने घर, खेत और संपत्ति छोड़कर हमेशा के लिए वहां से चले गए।
लोककथाओं के अनुसार, जाते समय ग्रामीणों ने कुलधरा को श्राप दिया कि यह गांव फिर कभी आबाद नहीं होगा। हालांकि इस श्राप का कोई ऐतिहासिक या वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है, लेकिन इसी लोकविश्वास ने कुलधरा को रहस्य और रोमांच का केंद्र बना दिया।
आज कुलधरा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित एक ऐतिहासिक स्थल है। दिन में हजारों पर्यटक यहां आते हैं, लेकिन शाम ढलते ही यहां का माहौल पूरी तरह बदल जाता है। स्थानीय मान्यताओं के कारण रात में यहां ठहरने की अनुमति नहीं दी जाती।
कुलधरा आज सिर्फ एक खंडहर नहीं, बल्कि स्वाभिमान, बलिदान और इतिहास की एक ऐसी गाथा है, जिसने इसे भारत के सबसे रहस्यमयी गांवों में शामिल कर दिया है।
