देश : केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब एक नया दावा सामने आया है, जिसने पूरे मामले को और अधिक चर्चा में ला दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार ने इस्तीफे से पहले धर्मेंद्र प्रधान का मंत्रालय बदलने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन छात्रों के आंदोलन का नेतृत्व कर रही कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया। पार्टी का कहना था कि उनकी मांग सिर्फ मंत्रालय बदलने की नहीं, बल्कि धर्मेंद्र प्रधान के पूर्ण इस्तीफे की थी और इस मुद्दे पर किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
बताया जा रहा है कि नीट पेपर लीक विवाद के बाद बढ़ते छात्र आंदोलन को देखते हुए सरकार समाधान तलाशने की कोशिश कर रही थी। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार चाहती थी कि धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्रालय से हटाकर किसी दूसरे मंत्रालय की जिम्मेदारी दे दी जाए, ताकि वे केंद्रीय मंत्रिमंडल का हिस्सा बने रहें। इसी सिलसिले में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने CJP के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका से बातचीत की थी।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के दौरान सरकार की ओर से पूछा गया था कि यदि धर्मेंद्र प्रधान का मंत्रालय बदल दिया जाए तो क्या आंदोलन समाप्त कर दिया जाएगा। हालांकि, CJP नेताओं ने इस प्रस्ताव को तुरंत खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि आंदोलन का उद्देश्य केवल मंत्रालय बदलवाना नहीं, बल्कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा सुनिश्चित करना है। उनका कहना था कि छात्रों के भविष्य से जुड़े इतने बड़े मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
गौरतलब है कि धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को अपने पद से इस्तीफा दिया था। इसके बाद यह दावा सामने आने से राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। हालांकि, सरकार की ओर से इस रिपोर्ट पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। ऐसे में इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और आने वाले दिनों में इस मामले पर और स्पष्टता सामने आ सकती है।
