लद्दाख के मिनामार्ग में एक महिला पर्यटक और सुरक्षाकर्मियों के बीच बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। वीडियो में पर्यटक को सुरक्षा प्रतिबंधों पर सवाल उठाते और खुद को “Gen Z” बताते हुए आपत्ति जताते देखा जा सकता है।लेकिन सेना को लेकर की गई कथित टिप्पणी के बाद अब देश के कई पूर्व सैन्य अधिकारियों ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
“सैनिकों का अपमान बर्दाश्त नहीं”
मिजोरम के राज्यपाल और पूर्व सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह (रिटायर्ड) ने कहा कि देश की रक्षा करने वाले सैनिकों पर गलत आरोप लगाना या उनका अनादर करना गलत है।उन्होंने कहा कि भारतीय सशस्त्र बल देश और उसे नुकसान पहुंचाने वाली ताकतों के बीच मजबूती से खड़े हैं। उनके मुताबिक आलोचना तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए, भावनाओं या बिना सोचे-समझे लगाए गए आरोपों के आधार पर नहीं।
“पहले कानून मानना सीखिए” — पूर्व सैन्य अधिकारी की कड़ी प्रतिक्रिया
चिनार कॉर्प्स के पूर्व कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लों (रिटायर्ड) ने भी महिला पर्यटक की टिप्पणियों पर तीखी प्रतिक्रिया दी।उन्होंने कहा कि लोग जिन संवेदनशील और खूबसूरत इलाकों में घूमने जाते हैं, वहां सैनिक दिन-रात सुरक्षा में तैनात रहते हैं और कई बार अपनी जान की बाजी तक लगा देते हैं।पूर्व अधिकारी ने पर्यटकों और आम नागरिकों से सुरक्षा बलों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करने और अपने अधिकारों की बात करने से पहले कानून का पालन करने की अपील की।
“Gen Z” को धमकी की तरह इस्तेमाल करने पर भी सवाल
चिनार कॉर्प्स के एक और पूर्व कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ (रिटायर्ड) ने भी इस तरह की टिप्पणियों को सैनिकों के बलिदान का अपमान बताया।
वहीं जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने “हम Gen Z हैं” जैसे वाक्यांश को धमकी के अंदाज में इस्तेमाल करने की बढ़ती प्रवृत्ति पर सवाल उठाया।
उन्होंने कहा कि हर विवाद या नाराजगी के दौरान अपनी पीढ़ी की पहचान को धमकी के तौर पर इस्तेमाल करना Gen Z की छवि को नुकसान पहुंचा सकता है।
क्यों संवेदनशील है मिनामार्ग और ज़ोजी ला का इलाका?
मिनामार्ग, लद्दाख के कारगिल जिले में ज़ोजी ला के पास श्रीनगर-लेह हाईवे पर स्थित है। यह इलाका सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है।
साथ ही यहां की सड़कें संकरी हैं और भूस्खलन, चट्टानें गिरने तथा मौसम में अचानक बदलाव जैसी स्थितियां भी पैदा हो सकती हैं। ऐसे में हालात के अनुसार वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित किया जाता है।अब सवाल यही है—सुरक्षा नियमों का विरोध करने से पहले क्या लोगों को यह समझना चाहिए कि सीमा और संवेदनशील इलाकों में तैनात जवान अपनी ड्यूटी क्यों और किन परिस्थितियों में निभा रहे हैं?लद्दाख के इस वायरल वीडियो ने एक बार फिर बहस छेड़ दी है—आलोचना का अधिकार अपनी जगह, लेकिन क्या सुरक्षा बलों के प्रति सम्मान की भी एक सीमा तय होनी चाहिए?
