टेक्नोलॉजी: कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के बीच इंसानी रचनात्मकता को लेकर एक दिलचस्प तस्वीर सामने आई है। एक अध्ययन में 2,965 लोगों ने AI से तैयार की गई कला की तुलना में ऐसी कला को ज्यादा पसंद किया, जिसमें इंसान की मेहनत, भावनाएं और रचनात्मकता का स्पष्ट असर दिखाई देता है। यह नतीजा ऐसे समय में सामने आया है, जब AI कुछ ही सेकंड में तस्वीरें, पेंटिंग और दूसरे तरह के विजुअल तैयार करने में सक्षम हो गया है।
अध्ययन से जुड़े निष्कर्षों में संकेत मिला कि तकनीकी रूप से आकर्षक और चमकदार होने के बावजूद AI से बनाई गई कला हर दर्शक को भावनात्मक रूप से नहीं जोड़ पाती। इसके मुकाबले इंसानों द्वारा बनाई गई कला में दिखाई देने वाली छोटी-छोटी असमानताएं, ब्रश स्ट्रोक, हाथ से किए गए बदलाव और कलाकार की व्यक्तिगत शैली लोगों को ज्यादा वास्तविक महसूस होती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, कला को पसंद करने का आधार केवल उसकी खूबसूरती या तकनीकी गुणवत्ता नहीं है। उसके पीछे मौजूद कहानी, कलाकार की मेहनत और उस रचना में दिखाई देने वाला ‘मानवीय निशान’ भी दर्शकों के लिए महत्वपूर्ण होता है। यही वजह है कि AI के बढ़ते प्रभाव के बावजूद पारंपरिक कला के प्रति लोगों का भरोसा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि लोग AI कला को पूरी तरह खारिज कर रहे हैं। AI अब डिजाइन, विज्ञापन, मनोरंजन और क्रिएटिव इंडस्ट्री का अहम हिस्सा बन चुका है। लेकिन यह अध्ययन बताता है कि तकनीक चाहे कितनी भी उन्नत क्यों न हो जाए, इंसानी अनुभव और भावनाओं से जुड़ी रचनात्मकता की अपनी अलग पहचान बनी हुई है। आने वाले समय में AI और मानव कलाकारों के बीच प्रतिस्पर्धा के बजाय दोनों के साथ मिलकर काम करने की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।
