उत्तर प्रदेश : (Lucknow)लखनऊ के बहुचर्चित 2004 कैंट फायरिंग मामले में बड़ा फैसला आया है। 22 साल बाद MP/MLA कोर्ट ने आरोपी बृजेश सिंह को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। यह केस उस समय सुर्खियों में आया था जब मुख्तार अंसारी और कृष्णानंद राय के काफिले आमने-सामने आ गए थे। जिसके बाद दोनों ओर से ताबड़तोड़ फायरिंग हुई थी।
तब मुख्तार अंसारी ने कृष्णानंद राय, बृजेश सिंह पर हत्या का प्रयास, बलवा आदि की धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई थी। बृजेश सिंह के साथ ही त्रिभुवन सिंह, सुनील राय, आनंद राय, अजय सिंह उर्फ गुड्डू को कोर्ट ने बरी कर दिया। 13 जनवरी, 2004 में कैंट थाना क्षेत्र में सदर रेलवे क्रॉसिंग पर दोनों गुटों के बीच फायरिंग हुई थी।
आमने-सामने हुई थी फायरिंग |
घटना वर्ष 2004 की है, जब लखनऊ के कैंट क्षेत्र में दो प्रभावशाली नेताओं के काफिले अचानक आमने-सामने आ गए थे। बताया जाता है कि उस समय मुख्तार अंसारी अपनी पत्नी के साथ गाजीपुर से लखनऊ आ रहे थे, जबकि कृष्णानंद राय लखनऊ से वापस गाजीपुर लौट रहे थे। दोनों ही उस समय विधायक थे और अपने-अपने समर्थकों के साथ यात्रा कर रहे थे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही दोनों आमने-सामने आए, पहचान होते ही माहौल गरमा गया और कुछ ही क्षणों में दोनों ओर से फायरिंग शुरू हो गई। करीब पांच मिनट तक कई राउंड गोलियां चलीं, जिससे इलाके में दहशत फैल गई थी।
