न्यू दिल्ली : देश में महंगाई की रफ्तार एक बार फिर बढ़ती हुई नजर आ रही है। मई महीने में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.93 प्रतिशत पहुंच गई है, जबकि अप्रैल में यह 3.48 प्रतिशत थी। पिछले पांच महीनों में यह पहली बार है जब महंगाई दर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के 4 प्रतिशत के लक्ष्य के काफी करीब पहुंची है। साल की शुरुआत में जनवरी में महंगाई दर सिर्फ 2.74 प्रतिशत थी, लेकिन लगातार बढ़ते हुए मई तक यह आंकड़ा 3.93 प्रतिशत पर आ गया।
महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह खाने-पीने की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी रही है। मई में फूड इंफ्लेशन बढ़कर 4.78 प्रतिशत हो गई, जबकि अप्रैल में यह 4.20 प्रतिशत थी। ग्रामीण इलाकों में खाने की महंगाई शहरों के मुकाबले ज्यादा रही। गांवों में फूड इंफ्लेशन 4.85 प्रतिशत और शहरों में 4.66 प्रतिशत दर्ज की गई।
इसके अलावा सोने और कीमती धातुओं की कीमतों में तेजी का असर भी साफ दिखाई दिया है। ज्वेलरी और कीमती धातुओं वाली कैटेगरी में महंगाई दर 56 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ी है। इससे आम लोगों के खर्च पर सीधा असर पड़ा है।
महंगाई के नए आंकड़ों के बाद रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की चिंता बढ़ सकती है। अगर महंगाई लगातार ऊंचे स्तर पर बनी रहती है तो ब्याज दरों में बदलाव की संभावना बढ़ सकती है। वहीं कमजोर मानसून, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और सप्लाई से जुड़ी परेशानियां आने वाले समय में महंगाई को और बढ़ा सकती हैं।
सीपीआई यानी कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स के जरिए महंगाई को मापा जाता है। मई का 3.93 प्रतिशत आंकड़ा आरबीआई के टॉलरेंस बैंड के अंदर जरूर है, लेकिन यह 4 प्रतिशत के लक्ष्य के बेहद करीब पहुंच गया है। आसान भाषा में समझें तो पिछले साल 100 रुपये में मिलने वाला सामान अब औसतन करीब 103.93 रुपये का हो गया है।
