लखनऊ: अयोध्या के श्री राम मंदिर में आज राम नवमी के पावन अवसर पर एक दिव्य और अलौकिक दृश्य देखने को मिला। दोपहर 12 बजे अभिजीत मुहूर्त में रामलला के ललाट पर सूर्य की पवित्र किरणें 9 मिनट तक पड़ीं, जिसे सूर्य तिलक कहा गया। यह दृश्य रामलला के जन्म का प्रतीक माना जा रहा है, क्योंकि सूर्यवंशी भगवान राम के जन्म के समय सूर्यदेव ने स्वयं उनके मस्तक पर तिलक लगाया था।
इससे पहले गरभगृह को फूलों से सजाया गया। रामलला को स्वर्ण जड़ित पीतांबर पहनाया गया, साथ ही सोने का मुकुट और हार से श्रृंगार किया गया। 14 पुजारियों की उपस्थिति में सबसे पहले पंचामृत से अभिषेक किया गया, फिर विशेष पूजा-अर्चना और आरती हुई। सूर्य तिलक के दौरान मंदिर के पट थोड़ी देर के लिए बंद किए गए, जिसके बाद रामलला को 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया जाएगा।
इस पूरे आयोजन के लिए एक उन्नत वैज्ञानिक प्रणाली का उपयोग किया गया। अष्टधातु की 20 पाइपों, चार लेंस और चार दर्पणों से बनी 65 फीट लंबी व्यवस्था ने सूर्य की किरणों को ठीक रामलला के ललाट पर केंद्रित किया। यह दूसरा सूर्य तिलक है, जो प्राण प्रतिष्ठा के बाद हुआ है।
राम जन्मभूमि परिसर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। करीब 10 लाख श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे, जिससे राम पथ, भक्ति पथ और जन्मभूमि पथ पर लंबी कतारें लगीं। सामान्य दिनों से तीन घंटे बढ़ाकर दर्शन 18 घंटे तक चले। देश-विदेश से आए रामभक्त इस पावन क्षण के साक्षी बने। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दूरदर्शन पर इस अनोखे दृश्य को देखा और राम भक्तों के साथ भावनात्मक रूप से जुड़े।
यह आयोजन न केवल धार्मिक उत्साह से भरा था, बल्कि आधुनिक विज्ञान और प्राचीन आस्था के सुंदर मेल का प्रतीक भी साबित हुआ। अयोध्या आज पूरे देश में राम भक्ति की लहर से गूंज उठी, जहां हर कोई रामलला के इस दिव्य सूर्य तिलक को देखकर आनंदित हुआ।