नई दिल्ली: संविधान दिवस के मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में राष्ट्रीय समारोह की अध्यक्षता की। कार्यक्रम में राष्ट्रपति ने 9 भाषाओं में संविधान की डिजिटल प्रतियों का लोकार्पण किया, जिसमें बोडो और कश्मीरी भाषा में पहली बार संविधान की प्रतियां तैयार की गई हैं।
इस अवसर पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि आज के दिन 26 नवंबर 1949 में संविधान सभा के सदस्यों ने भारत संविधान के निर्माण का कार्य संपन्न किया था। बाबा साहब डॉ भीमराव अंबेडकर हमारे संविधान के प्रमुख निर्माता थे। बाबा साहब के 125 वीं जयंती के वर्ष में 26 नवंबर 2015 में प्रतिवर्ष संविधान दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया।
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि आज के दिन, पूरा देश, भारतीय लोकतन्त्र के आधार, हमारे संविधान के प्रति तथा उसके निर्माताओं के प्रति आदर व्यक्त करता है। ‘हम भारत के लोग’, अपने संविधान के प्रति व्यक्तिगत और सामूहिक स्तर पर आस्था व्यक्त करते हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि हमारा संविधान, हमारी राष्ट्रीय अस्मिता का ग्रंथ है। यह हमारी राष्ट्रीय पहचान का ग्रंथ है। यह colonial mindset का परित्याग करके nationalist mindset के साथ देश को आगे बढ़ाने का मार्गदर्शक ग्रंथ है।
समारोह में राष्ट्रपति ने महिला सशक्तिकरण का जिक्र करते हुए कहा कि, हमारे सशक्त संविधान के कारण महिला सशक्तिकरण को मजबूती मिल रही है। महिलाओं की ताकत पंचायत से संसद तक बढ़ी है। हमारे मजबूत संविधान की बदौलत राजनीतिक चिंतन की क्षमता भी विकसित हुई है।
