उज्जैन में खड़े हनुमान जी की प्रतिमा पर विवाद, हर्षा रिछारिया बोलीं- ‘उज्जैन ने याद दिलाई अयोध्या’

उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन में खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को हटाए जाने की चर्चाओं के बीच विवाद लगातार बढ़ता नजर आ रहा है। अब साध्वी हर्षा रिछारिया ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि उज्जैन का घटनाक्रम उन्हें अयोध्या की याद दिला रहा है। उन्होंने कहा कि जिस तरह एक समय रामलला को टेंट में देखा गया था, उसी तरह आज हनुमान जी के मंदिर को लेकर स्थिति सामने आ रही है।

हर्षा रिछारिया ने स्पष्ट कहा कि वह सरकार के विरोध में नहीं हैं और सिंहस्थ कुंभ 2028 को लेकर सरकार द्वारा किए जा रहे विकास कार्यों का समर्थन करती हैं। हालांकि, उनका कहना है कि विकास के नाम पर मंदिर को हटाया नहीं जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इस स्थान से मंदिर हटाने की पहले भी चार कोशिशें हो चुकी हैं और अब ऐसी कोई कोशिश नहीं होनी चाहिए। रिछारिया ने कहा कि यदि प्रशासन मंदिर के पुनर्निर्माण की जिम्मेदारी नहीं उठाता है तो वह स्वयं मंदिर निर्माण में सहयोग करेंगी।

‘कृपया इस मंदिर को रहने दें’

साध्वी ने भावुक अंदाज में कहा कि भगवान भक्तों को बिना मांगे बहुत कुछ देते हैं और भक्तों की उनसे यही प्रार्थना है कि उन्हें भगवान के पक्ष में आवाज उठाने का साहस मिले। उन्होंने संतों, मठों और अखाड़ों से भी आगे आकर मंदिर निर्माण में सहयोग करने की अपील की।

वहीं, प्रशासन ने पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि मशीनों के जरिए प्रतिमा को हटाने का कोई प्रयास नहीं किया गया है। प्रशासन के मुताबिक बिना संतों की सहमति के प्रतिमा नहीं हटाई जाएगी। साथ ही लोगों से सोशल मीडिया पर चल रही भ्रामक और निराधार खबरों पर विश्वास न करने की अपील की गई है।

विवाद में आस्था बनाम विकास का सवाल

उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच यह मामला केवल एक मंदिर या प्रतिमा तक सीमित नहीं रह गया है। इसके केंद्र में आस्था, धार्मिक स्थलों के संरक्षण और शहर के विकास के बीच संतुलन का सवाल भी खड़ा हो गया है। फिलहाल प्रशासन के बयान से प्रतिमा को लेकर तत्काल राहत की स्थिति दिखाई दे रही है, लेकिन इस मुद्दे पर संत समाज और स्थानीय लोगों की नजर आगे की कार्रवाई पर बनी हुई है।

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