दिल्ली: रूस और यूरोपीय देशों के बीच बढ़ता तनाव अब समुद्री रास्तों तक पहुंच गया है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूरोपीय देशों को चेतावनी देते हुए कहा है कि रूस के जहाजों की आवाजाही रोकने की कोशिश की गई, तो बाल्टिक सागर में भी होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे हालात पैदा हो सकते हैं।
मॉस्को में पत्रकारों से बातचीत के दौरान पुतिन ने कहा कि रूस यूरोप के साथ युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अगर कोई देश उससे टकराव का रास्ता चुनता है तो उसे इसके गंभीर परिणामों के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि तनाव अगर चरम पर पहुंचा तो किसी की जीत नहीं होगी।
दरअसल, बाल्टिक सागर रूस के व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। इसी मार्ग से रूस बड़ी मात्रा में तेल और अन्य सामानों का निर्यात करता है। यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोपीय देशों ने रूस पर कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं। अब पश्चिमी देश प्रतिबंधों से बचने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे रूसी जहाजों की जांच और निगरानी बढ़ा रहे हैं।
रूस इसे अपने व्यापार और समुद्री आवाजाही में हस्तक्षेप मानता है। वहीं, फिनलैंड और स्वीडन के NATO में शामिल होने के बाद बाल्टिक क्षेत्र में सैन्य और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा भी बढ़ी है।
पुतिन ने फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गार स्टोरे से बातचीत का भी बचाव किया। उनका कहना है कि यूरोप के साथ संबंध सुधारने के लिए संवाद जरूरी है।
अगर बाल्टिक सागर में समुद्री आवाजाही बाधित होती है, तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार, शिपिंग लागत और वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है। भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों के लिए भी यह चिंता का विषय बन सकता है।
ऐसे में रूस की यह चेतावनी यूरोप और मॉस्को के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का एक नया संकेत मानी जा रही है।
