बिज़नेस : टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के लिए वित्त वर्ष की पहली तिमाही चुनौतीपूर्ण रही। अप्रैल से जून के बीच कंपनी का मुनाफा 80% से ज्यादा गिरकर ₹775 करोड़ रह गया। पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में कंपनी ने ₹3,924 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया था। यानी एक साल में कंपनी के मुनाफे में करीब ₹3,149 करोड़ की कमी आई है।
कंपनी के प्रदर्शन पर सबसे बड़ा असर जगुआर लैंड रोवर यानी JLR की सप्लाई चेन में आई रुकावटों का पड़ा। स्पेयर पार्ट्स की सप्लाई बाधित होने के साथ एक बड़े कंपोनेंट सप्लायर के यहां आग लगने से भी उत्पादन और डिलीवरी प्रभावित हुई। इसके अलावा मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष और कुछ जगुआर मॉडल्स के बंद होने का असर भी कंपनी के वित्तीय नतीजों पर दिखाई दिया।
हालांकि, मुनाफे में भारी गिरावट के बावजूद कंपनी के ऑपरेशनल रेवेन्यू में बढ़ोतरी हुई है। पहली तिमाही में रेवेन्यू 9% से ज्यादा बढ़कर ₹95,799 करोड़ पहुंच गया, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह ₹87,677 करोड़ था। इसका मतलब है कि कंपनी की बिक्री और ऑपरेशनल गतिविधियों में मजबूती बनी रही, लेकिन लागत और सप्लाई से जुड़ी परेशानियों ने मुनाफे पर दबाव डाला।
कंपनी का EBITDA मार्जिन भी 130 बेसिस पॉइंट घटकर 7.4% रह गया। इस तिमाही में ₹32 करोड़ का एक्सेप्शनल लॉस भी दर्ज किया गया। वहीं, कंपनी की प्रति शेयर आय यानी EPS घटकर ₹2.10 रह गई, जो पिछले साल इसी अवधि में ₹6.84 थी।
इन नतीजों से साफ है कि टाटा मोटर्स के लिए सप्लाई चेन और ग्लोबल परिस्थितियां फिलहाल बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
