आगरा में मौत के करीब 17 घंटे बाद 65 वर्षीय महिला जिंदा हो गईं। अचानक से दामाद का हाथ पकड़ लिया। कहा- “मैं जिंदा हूं। मुझे कहां ले जा रहे।” यह सुनते ही घर में अफरा-तफरी मच गई। परिजन ने उन्हें तुरंत एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उनका इलाज चल रहा है।
मामला जिला मुख्यालय से 8 किमी दूर ट्रांस यमुना थाना क्षेत्र का है। दरअसल, महिला लीवर संबंधी बीमारी से पीड़ित थीं। बरेली के एक निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। डॉक्टर ने बुधवार तड़के 3 बजे महिला को मृत घोषित कर दिया था।
देर शाम को शव घर लाया गया। रिश्तेदार और परिचित अंतिम दर्शन के लिए जुटे थे। इसी दौरान दामाद अंतिम प्रणाम करने पहुंचे। जैसे ही उन्होंने सास के पैर छुए, महिला के शरीर में हलचल हुई और वह जीवित हो गईं।श्रीनगर कॉलोनी निवासी शीला देवी के पति हरिओम माहौर का निधन हो चुका है। वह अपने बेटे सुनील माहौर के परिवार के साथ रहती हैं। उनका दूसरा बेटा संजीव माहौर बदायूं के एक निजी अस्पताल में कार्यरत है। करीब 20 दिन पहले शीला देवी इलाज के लिए उसके पास बदायूं गई थीं। इसके बाद बेटे ने सोमवार को उन्हें बरेली के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। मंगलवार को उनकी हालत बिगड़ने पर वेंटिलेटर पर रखा गया।
बुधवार तड़के करीब 3 बजे डॉक्टरों ने शीला देवी को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद बेटा एंबुलेंस से उनका शव लेकर शाम करीब 7 बजे आगरा स्थित घर पहुंचा। शव को घर के एक कमरे में जमीन पर रखा गया। अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू हो गईं। फूल-मालाएं और अन्य सामान आ गया था, जबकि रिश्तेदार अंतिम विदाई के लिए पहुंचने लगे थे।रात करीब 8 बजे उनके दामाद ने पैर छुए। इसी दौरान शीला देवी के शरीर में हलचल होने लगी। अचानक से उन्होंने दामाद का हाथ पकड़ लिया। कहा, “मुझे कहां लेकर जा रहे हो? तुम सब रो क्यों रहे हो? मैं जिंदा हूं, मरी नहीं हूं।” यह सुनते ही परिवार के लोग हैरान रह गए। बिना देर किए परिजन उन्हें आगरा के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उनका उपचार चल रहा है।
पड़ोसी धर्मपाल ने बताया कि एंबुलेंस से शव घर लाने के बाद उसे कमरे में रखा गया था। इसी दौरान उनकी बेटी और दामाद पहुंचे। दामाद ने जैसे ही उनके पैर छुए, इसी दौरान उनकी सांसें लौट आईं।
