Uttar Pradesh: अयोध्या की पावन धरा आज एक ऐतिहासिक क्षण की साक्षी बनी जब भारत की राष्ट्रपति महामहिम द्रौपदी मुर्मू प्रभु श्री राम के दरबार में नतमस्तक हुईं। राष्ट्रपति बनने के बाद अपनी पहली अयोध्या यात्रा पर पहुंचीं महामहिम का स्वागत पूरी गरिमा और भक्ति भाव के साथ किया गया। उनके आगमन के साथ ही पूरी राम नगरी सुरक्षा के अभेद्य घेरे में थी, लेकिन वातावरण पूरी तरह राममय बना रहा। यात्रा की शुरुआत में राष्ट्रपति ने सबसे पहले हनुमानगढ़ी के दर्शन किए और बजरंगबली का आशीर्वाद लिया, जिसके बाद उनका काफिला सीधे राम जन्मभूमि परिसर की ओर बढ़ा।

राम मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंचते ही राष्ट्रपति ने मंदिर की भव्य वास्तुकला और पत्थरों पर उकेरी गई बारीक नक्काशी का बड़े गौर से अवलोकन किया। जब वे गर्भगृह के सामने पहुंचीं, तो रामलला की मनमोहक और दिव्य प्रतिमा को देखकर वे भाव-विभोर हो गईं। उन्होंने पूरी श्रद्धा के साथ भगवान के चरणों में शीश नवाया और देश की सुख-शांति एवं समृद्धि के लिए विशेष प्रार्थना की। इस दौरान मंदिर के मुख्य पुजारियों ने उन्हें रामलला का प्रसाद और स्मृति चिन्ह भेंट कर उनका अभिनंदन किया, जिससे वहां का माहौल और भी आध्यात्मिक हो गया।
इस पूरी यात्रा का सबसे विशेष और आध्यात्मिक केंद्र रहा तमिलनाडु से लाया गया ‘श्रीराम यंत्र’। राष्ट्रपति ने इस अत्यंत पवित्र और प्राचीन परंपराओं से जुड़े यंत्र का विधि-विधान से पूजन किया। वैदिक ब्राह्मणों के मंत्रोच्चार के बीच जब महामहिम ने इस यंत्र पर पुष्प अर्पित किए और आरती उतारी, तो ऐसा प्रतीत हुआ मानो उत्तर और दक्षिण भारत की सांस्कृतिक धाराएं एक बिंदु पर आकर मिल गई हों। यह यंत्र न केवल शक्ति का प्रतीक है, बल्कि देश की एकता को भी दर्शाता है। मंदिर भ्रमण के अंतिम चरण में राष्ट्रपति ने कुबेर टीला जाकर जटायु राज की प्रतिमा को भी नमन किया और वहां के ऐतिहासिक महत्व के बारे में जानकारी ली। उनकी इस यात्रा ने न केवल अयोध्या के महत्व को वैश्विक स्तर पर पुनः रेखांकित किया, बल्कि करोड़ों भारतीयों के लिए यह गर्व और गौरव का पल बन गया।
