लखनऊ: 22 जून 2026, सोमवार दोपहर करीब 2:30 बजे लखनऊ के अलीगंज (पुरनिया) इलाके में एक तीन मंजिला बिल्डिंग में अचानक आग भड़क उठी। एनिमेशन कोचिंग, लाइब्रेरी, गेमिंग जोन और दुकानों से भरी इस इमारत में पढ़ रहे युवा छात्र-छात्राएं धुएं और लपटों के बीच फंस गए। महज कुछ घंटों में 15 जिंदगियां खत्म हो गईं। कई छात्र पहली मंजिल से कूदकर बच निकले, लेकिन गंभीर चोटों के साथ। घायलों का KGMU में इलाज चल रहा है।

आग की शुरुआत शॉर्ट सर्किट से बताई जा रही है, लेकिन असली वजह इमारत की गंभीर लापरवाही थी। फायर सेफ्टी NOC नहीं, एग्जिट गेट्स गायब, अग्निशमन उपकरण नदारद। रेसिडेंशियल एरिया में कमर्शियल इस्तेमाल, 2016 का डिमोलिशन नोटिस भी अनदेखा। बचाव कार्य में भी देरी हुई, जिससे धुआं भरने के कारण कई छात्र दम घुटने से बेहोश हो गए।

घटना की खबर फैलते ही माता-पिता दौड़े आए। बेटी का शव देखकर एक मां बेहोश हो गईं, बेटे की लाश देखकर पिता बेहोश हो गए। बहनें चीख-चीखकर रोईं। कई युवाओं ने घर पर आखिरी फोन कॉल किया। पूरे रात 7 घंटे में 15 पोस्टमॉर्टम हुए। चीखों और आंसुओं से भरा माहौल था।

सरकार और प्रशासन की कार्रवाई
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर तुरंत सख्ती शुरू हुई। बिल्डिंग मालिक रामकृष्ण उपाध्याय, वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, कोचिंग संचालक तूशार कृष्णा जायसवाल और स्टूडियो ऑपरेटर सुरेश कुमार साहू समेत चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। FIR में BNS की विभिन्न धाराएं और फायर सर्विस एक्ट लगाया गया।
चार अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया—LDA के इंजीनियर, फायर विभाग और बिजली विभाग के अफसर। बिल्डिंग को सील कर डिमोलिशन का आदेश जारी। पूरे उत्तर प्रदेश में कोचिंग सेंटर्स पर छापेमारी चल रही है, अब तक 44 सेंटर्स सील किए जा चुके हैं। दो सदस्यीय SIT गठित की गई है, जिसे 7 दिनों में रिपोर्ट देनी है।

यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टेमैटिक भ्रष्टाचार और सुरक्षा मानकों की अनदेखी का नतीजा है। SIT की रिपोर्ट में और बड़े खुलासे हो सकते हैं। पीड़ित परिवार न्याय की मांग कर रहे हैं। उम्मीद है कि इस बार लापरवाहों पर सख्त कार्रवाई होगी, ताकि भविष्य में ऐसे हादसे न दोहराए जाएं।
