27 दिन बाद खत्म हुई सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल, सरकार से लिखित आश्वासन के बाद लिया बड़ा फैसला

नई दिल्ली। NEET पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर 27 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने आखिरकार अपना अनशन समाप्त कर दिया। गुरुवार देर रात केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में उन्हें जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया।

शुक्रवार सुबह जारी अपने वीडियो संदेश में वांगचुक ने बताया कि पिछले दो दिनों से केंद्र सरकार के साथ लगातार बातचीत चल रही थी। सरकार की ओर से तीन प्रमुख मांगों पर लिखित आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया।

वांगचुक के अनुसार, सरकार ने आंदोलन में शामिल छात्रों पर कोई मुकदमा दर्ज नहीं करने, NEET पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करने के मुद्दे पर संसद में चर्चा कराने तथा कथित परीक्षा घोटाले से जुड़े आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा देने का भरोसा दिया है।

हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर सरकार की ओर से कोई आश्वासन नहीं मिला। वांगचुक ने कहा कि छात्रों की सुरक्षा उनके लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता थी और आगे की लड़ाई लड़ने के लिए उनका स्वस्थ रहना भी जरूरी है।

इस दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों के करीब 65 सांसदों ने भी वांगचुक का समर्थन किया और संसद में परीक्षा सुधार तथा पेपर लीक का मुद्दा उठाने का भरोसा दिया।

वहीं, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने वांगचुक के फैसले का स्वागत किया, लेकिन कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक जंतर-मंतर पर आंदोलन जारी रहेगा।

गौरतलब है कि सोनम वांगचुक ने 28 जून को जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। इससे पहले भी वे लद्दाख को लेकर लंबे आंदोलन और भूख हड़ताल कर चुके हैं। अब सरकार के लिखित आश्वासन के बाद उनका अनशन भले समाप्त हो गया हो, लेकिन परीक्षा सुधार और जवाबदेही की मांग को लेकर आंदोलन अभी खत्म नहीं माना जा रहा है।

 

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