Lucknow: लखनऊ के केजीएमयू महिला डॉक्टर मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए खुलासे सामने आ रहे हैं। अब इस मामले में डार्क वेब के जरिए देशभर में नेटवर्क चलाने और साथियों को टास्क देने की बात सामने आई है। एसटीएफ की जांच में आरोपी रमीजुद्दीन के लैपटॉप से कई अहम डिजिटल सुराग मिलने की उम्मीद है।
जांच के मुताबिक, रमीजुद्दीन कथित तौर पर डार्क वेब के जरिए अलग-अलग शहरों में मौजूद अपने साथियों के संपर्क में रहता था। वह उन्हें टास्क देता था और महिलाओं को विश्वास में लेकर अपने प्रभाव में लाने के तरीके भी बताता था। अब एसटीएफ उसके लैपटॉप में मौजूद डिजिटल डाटा, संपर्कों और अन्य तकनीकी जानकारियों की पड़ताल कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित नेटवर्क में कौन-कौन शामिल था और उसकी गतिविधियां कितने शहरों तक फैली थीं।
बता दें कि दिसंबर 2025 में केजीएमयू की एक महिला डॉक्टर ने रमीजुद्दीन के खिलाफ यौन शोषण, धर्मांतरण के लिए दबाव बनाने और प्रताड़ित करने समेत गंभीर आरोपों में मुकदमा दर्ज कराया था। इसके बाद मामले की जांच एसटीएफ को सौंपी गई।
अब जांच की आंच पीजीआई तक पहुंच सकती है। एसटीएफ की पड़ताल में पीजीआई के एक डॉक्टर की भूमिका भी सामने आने का दावा किया गया है। आरोप है कि वह रमीजुद्दीन की मदद करते थे और उसे मेडिकल छात्राओं तथा डॉक्टरों से मिलवाते थे। इस संबंध में पीजीआई में पूछताछ की संभावना जताई जा रही है।
वहीं, एरा मेडिकल यूनिवर्सिटी में केजीएमयू के करीब आधा दर्जन डॉक्टरों के निवेश का पहलू भी जांच के दायरे में बताया जा रहा है।
फिलहाल एसटीएफ डिजिटल साक्ष्यों, संपर्कों और आर्थिक संबंधों की जांच कर रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
