बिज़नेस: भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड यानी BPCL ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। इस बार कंपनी को ₹3,962 करोड़ का शुद्ध घाटा हुआ है, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी ने ₹6,124 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया था। वहीं, मार्च तिमाही में भी BPCL ने ₹3,191 करोड़ का लाभ कमाया था। ऐसे में इस बार के नतीजे निवेशकों के लिए निराशाजनक रहे। हालांकि राहत की बात यह रही कि कंपनी के कारोबार में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली और ऑपरेशंस से होने वाला रेवेन्यू 23 प्रतिशत बढ़कर ₹1.59 लाख करोड़ पहुंच गया। पिछले साल इसी अवधि में कंपनी का रेवेन्यू ₹1.29 लाख करोड़ था, जबकि मार्च तिमाही के मुकाबले भी इसमें करीब 18 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
कंपनी के मुताबिक इस बड़े घाटे की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी रही। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव के कारण क्रूड ऑयल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं। इसके साथ ही शिपिंग, फ्रेट और इंश्योरेंस की लागत भी काफी बढ़ गई। लेकिन सरकार और बाजार की परिस्थितियों को देखते हुए BPCL इन बढ़ी हुई लागतों का पूरा बोझ पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में नहीं जोड़ सकी। यही कारण रहा कि कंपनी की आय बढ़ने के बावजूद उसे भारी घाटे का सामना करना पड़ा।
शेयर बाजार में भी इन नतीजों का असर दिखाई दिया। BPCL का शेयर करीब 3 प्रतिशत गिरकर ₹309 पर बंद हुआ। इस साल की शुरुआत से अब तक शेयर लगभग 19 प्रतिशत टूट चुका है, जबकि पिछले छह महीनों में इसमें 12 प्रतिशत और एक साल में करीब 9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
24 जनवरी 1976 को स्थापित BPCL देश की प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों में शामिल है। कंपनी मुंबई, कोच्चि, नुमालीगढ़ और बीना में रिफाइनरियां संचालित करती है और सालाना 40 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक रिफाइनिंग क्षमता रखती है। इसके अलावा कंपनी पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और लुब्रिकेंट जैसे उत्पादों की सप्लाई भी पूरे देश में करती है।
