लेखराम मौर्य
लखनऊ । राजधानी के मलिहाबाद विकासखंड की ग्राम पंचायत कसमंडी खुर्द में घोटालों की बाढ़ आ चुकी है क्योंकि यहां पूर्व में तैनात रहे सचिव ने प्रधान के साथ मिलकर बिना काम कराए फर्जी फोटो डाल कर लाखों रुपए निकल लिये।


हैंड पाइप मरम्मत, रीबोर और नए हैंड पाइप के नाम पर 4 साल में निकले ₹ 5216766
इस पंचायत में अब तक हैंड पाइप मरम्मत नए हैंड पाइप तथा रीबोर करने के नाम पर 52 लाख 16 हजार 766 रुपए सरकारी खजाने से आहरित किए गए लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि आज भी पंचायत में अनेक हैंड पाइप ध्वस्त पड़े हैं जिनकी मशीनें तक गायब हो गई हैं परंतु यहां सब सरकारी धन की लूट में मस्त हैं। वित्तीय वर्ष 21-22 में 791000,22-23 में 1406442, 23-24 में 1175914, 24-25 में 1144810 तथा 25-26 में 438600 रुपए निकाले गए। इसके अलावा 21- 22 में अमानीगंज के पास नये बसे जद्दाखेड़ा में किशन के घर से हरदोई रोड तक इंटरलॉकिंग लग गई जिसकी अनुमानित लागत 871500 थी जिसमें से इस इंटरलॉकिंग के निर्माण पर चार लाख 29960 रुपए खर्च हो गए लेकिन 4 साल बाद भी यहां टूटा फूटा खड़ंजा ही लगा है इंटरलॉकिंग का कहीं अता-पता नहीं है। यह हल केवल इस जगह का नहीं है ऐसा इस पंचायत में कई जगह कागजों में निर्माण करके पैसा निकाल लिया गया।


ग्राम पंचायत में साफ सफाई के नाम पर निकाले गए ₹8 लाख
यहां पिछले वित्तीय वर्षों में लगभग ₹800000 साफ सफाई के नाम पर भी निकाल लिए गए जबकि नालियां जैसे तब बज बजा रही थी वैसे ही आज भी बज बजा रही हैं। अभी हाल ही में इस पंचायत के दर्जनों लोग विकासखंड कार्यालय पहुंच गए थे जहां बीडीओ से शिकायत करने के बाद जद्दा खेड़ा में थोड़ी सी नाली की सिल्ट अवश्य निकाल दी गई और जगहों पर अभी भी वही हाल है उसी समय विकासखंड में उपस्थित ग्राम पंचायत के सचिव ने कहा कि बरसात खत्म होने के बाद जद्दा खेड़ा में काम करा दिया जाएगा । लेकिन यहां गौर करने की बात यह है कि जो पैसा 4 साल पहले तत्कालीन सचिव और प्रधान ने निकाल लिया था उस पर क्या कार्रवाई हुई । इस पंचायत में लगभग डेढ़ दर्जन सीसी इंटरलॉकिंग और सीसी रोड बनाई गई हैं जिनमें से कुछ पहले कागजों में बन गई थी जिन्हें वर्तमान सचिव ने पिछले 6 महीने में बनवाया है अब अब जांच का विषय यह है कि जिस काम का पैसा 4 साल पहले निकाला जा चुका है क्या उस काम का पैसा दोबारा निकाला गया है या फिर उस पैसे की वसूली कर निर्माण कार्य कराया जा रहा है।

लेबर, मिस्त्री, जेसीबी, और साफ सफाई के नाम पर प्रधान ने निकाले लाखों रुपए
अभिलेखों को देखने से पता चलता है कि ग्राम प्रधान सलीम के नाम पर लेबर, मिस्त्री, और जेसीबी के साथ-साथ साफ सफाई के नाम पर भी लाखों रुपए का भुगतान किया गया है। ग्रामीणों ने बताया कि यहां कई बार भ्रष्टाचार की शिकायत हुई और जांच भी हुई तथा एक साल तक पुराने सचिव का खाता भी बंद रहा लेकिन बाद में नए सचिव के आने पर खाते का संचालन शुरू हुआ। लेकिन भ्रष्टाचार की जांचों का नतीजा क्या हुआ यह किसी को पता नहीं है । अब देखना है कि ग्राम पंचायत से लेकर विकासखंड कार्यालय तक भ्रष्टाचार में लिफ्त जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारी पर क्या कार्रवाई होती है?
