OSM विवाद के बीच CBSE अध्यक्ष और सचिव हटाए गए, जांच के लिए समिति गठित

नई दिल्ली, 3 जून: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाओं के मूल्यांकन में इस्तेमाल की गई ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर उठे विवाद के बीच केंद्र सरकार ने बोर्ड के अध्यक्ष राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता को उनके पदों से हटा दिया है। साथ ही, OSM प्रणाली के लिए सेवाओं की खरीद प्रक्रिया की जांच के लिए एक सदस्यीय समिति का गठन किया गया है, जिसे एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।

सरकार ने लोखंडे प्रशांत सीताराम को CBSE का नया अध्यक्ष और वरुण भारद्वाज को नया सचिव नियुक्त किया है।

साइबर सुरक्षा खामियों के आरोपों से बढ़ा विवाद

OSM प्रणाली को लेकर विवाद तब गहराया जब पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी निवासी 19 वर्षीय एथिकल हैकर और साइबर सुरक्षा शोधकर्ता निसर्ग अधिकारी ने मूल्यांकन पोर्टल में कई गंभीर सुरक्षा खामियां होने का दावा किया। निसर्ग के अनुसार, पोर्टल की तकनीकी जांच के दौरान उन्हें एक हार्ड-कोडेड “मास्टर पासवर्ड” मिला, जिसकी मदद से किसी भी परीक्षक (Examiner) के अकाउंट तक पहुंच बनाई जा सकती थी।

उनका दावा था कि इस कमजोरी का दुरुपयोग कर कोई व्यक्ति छात्रों के अंक बदल सकता था, उत्तर पुस्तिकाएं देख सकता था और शिक्षकों की कुछ व्यक्तिगत जानकारी तक पहुंच सकता था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि तकनीकी कॉन्फ़िगरेशन में खामियों के कारण लाखों स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएं और अन्य संवेदनशील शैक्षणिक रिकॉर्ड सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हो सकते थे।

फरवरी में भेजी गई थी रिपोर्ट

निसर्ग अधिकारी के अनुसार, उन्होंने फरवरी 2026 में इन खामियों की जानकारी भारत सरकार की कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (CERT-In) और CBSE को दी थी। उनका कहना है कि पर्याप्त कार्रवाई न होने के बाद उन्होंने इस मामले से जुड़े कुछ तकनीकी साक्ष्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और अपने ब्लॉग के माध्यम से सार्वजनिक किए।

शुरुआत में CBSE ने डेटा लीक या हैकिंग संबंधी दावों को खारिज किया था। हालांकि, 31 मई 2026 को जारी एक आधिकारिक बयान में बोर्ड ने ऑनमार्क पोर्टल में कुछ “कमजोरियों” की मौजूदगी स्वीकार करते हुए सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए विशेषज्ञों की सेवाएं लेने की जानकारी दी।

सर्विस प्रोवाइडर की भूमिका पर भी सवाल

CBSE ने OSM प्रणाली के संचालन के लिए कोएम्प्ट एडुटेक प्राइवेट लिमिटेड को सेवा प्रदाता नियुक्त किया था। रिपोर्टों के अनुसार, कंपनी के प्रदर्शन को लेकर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। बताया जा रहा है कि 2019 में, जब कंपनी ग्लोबरेना टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के नाम से कार्यरत थी, तब वह तेलंगाना राज्य बोर्ड परीक्षा के मूल्यांकन संबंधी विवाद में भी चर्चा में आई थी।

सूत्रों के अनुसार, डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली के लिए सेवा प्रदाता के चयन की सिफारिश करने वाली समिति की अध्यक्षता तत्कालीन CBSE सचिव हिमांशु गुप्ता ने की थी।

छात्रों ने की थीं कई शिकायतें

इस वर्ष पहली बार CBSE ने कक्षा 12 की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए पूरी तरह डिजिटल प्रणाली का उपयोग किया। परिणाम घोषित होने के बाद कई छात्रों ने स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं में धुंधले पृष्ठ, गायब उत्तर, अधूरी स्कैनिंग तथा कुछ मामलों में अन्य छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं दिखाई देने जैसी शिकायतें दर्ज कराईं।

इन शिकायतों के मद्देनजर CBSE ने उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन की गई प्रतियों में त्रुटियों के सत्यापन और उत्तरों के पुनर्मूल्यांकन के लिए ऑनलाइन पोर्टल खोला है।

6 जून तक कर सकते हैं आवेदन

CBSE ने कहा है कि जिन छात्रों को अपनी उत्तर पुस्तिका की स्कैन की गई प्रति में किसी प्रकार की त्रुटि दिखाई देती है, वे सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए ऑनलाइन पोर्टल 2 जून से 6 जून (मध्यरात्रि) तक खुला रहेगा।

इस बीच, केंद्र सरकार द्वारा गठित जांच समिति OSM प्रणाली की खरीद प्रक्रिया, तकनीकी सुरक्षा प्रबंधों और सेवा प्रदाता की भूमिका की समीक्षा करेगी। समिति की रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

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