आयुर्वेद को लेकर दुनिया भर में बढ़ती रुचि के बीच अब वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित यानी ‘साइंटिफिक-आयुर्वेद’ की चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आयुर्वेद की पारंपरिक ज्ञान प्रणाली को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़कर लोगों को बेहतर और सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं दी जा सकती हैं। इसी विषय पर आयुर्वेदिक ब्रांड कपिवा के संस्थापक और सीईओ अमीव शर्मा ने कहा कि जड़ी-बूटियों और आयुर्वेदिक फॉर्मुलेशन की प्रभावशीलता और सुरक्षा साबित करने के लिए सख्त क्लीनिकल ट्रायल बेहद जरूरी हैं।
उन्होंने बताया कि आयुर्वेद की प्रसिद्ध अवधारणा ‘दिनचर्या’ आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी पहले थी। समय पर जागना, संतुलित भोजन करना, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद लेना और अनुशासित जीवनशैली अपनाना आज भी अच्छे स्वास्थ्य की कुंजी है। आधुनिक विज्ञान भी इन सिद्धांतों को सर्केडियन रिद्म, मेटाबॉलिज्म और बिहेवियरल साइंस जैसे नामों से स्वीकार करता है। उनका कहना है कि आयुर्वेद का उद्देश्य केवल बीमारी का इलाज नहीं, बल्कि लंबे समय तक स्वस्थ और बेहतर जीवन देना है।
अमीव शर्मा ने स्पष्ट किया कि आयुर्वेद को आधुनिक चिकित्सा का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। गंभीर संक्रमण, हार्ट अटैक, कैंसर या दुर्घटना जैसी आपात स्थितियों में आधुनिक चिकित्सा ही सबसे प्रभावी है। वहीं आयुर्वेद जीवनशैली सुधारने, रोगों की रोकथाम और शरीर के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसलिए दोनों चिकित्सा प्रणालियों का समन्वय ही भविष्य का सबसे बेहतर मॉडल होगा।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2016 में शुरू हुई कपिवा आज 500 करोड़ रुपये से अधिक का वार्षिक कारोबार करने वाली कंपनी बन चुकी है। कंपनी के लगभग 70 प्रतिशत ग्राहक दोबारा उत्पाद खरीदते हैं और इसके उत्पाद देश के 400 से अधिक शहरों में एक लाख से ज्यादा स्टोर्स पर उपलब्ध हैं। कंपनी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी तेजी से अपनी पहुंच बढ़ा रही है और एम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों के साथ भी शोध कार्य कर रही है।
अमीव शर्मा का कहना है कि केवल पारंपरिक होने से कोई भी आयुर्वेदिक नुस्खा प्रभावी साबित नहीं हो जाता। उसकी सुरक्षा, सही मात्रा और वास्तविक प्रभाव को वैज्ञानिक शोध और क्लीनिकल ट्रायल के जरिए प्रमाणित करना जरूरी है। उनका मानना है कि हेल्दी एजिंग, प्रिवेंटिव हेल्थकेयर, तनाव प्रबंधन और टिकाऊ जीवनशैली जैसे क्षेत्रों में आयुर्वेद का भविष्य बेहद मजबूत है और यही वजह है कि भारत के साथ-साथ दुनिया के कई देश अब साइंटिफिक-आयुर्वेद को तेजी से अपना रहे हैं।
