बिज़नेस: आलू-प्याज समेत रोजमर्रा की जरूरी चीजों के दाम बढ़ने का असर अब आम लोगों की जेब पर साफ दिखाई देने लगा है। देश में फुटकर महंगाई अगस्त महीने में बढ़कर 4.82 प्रतिशत पर पहुंच गई। खास बात यह है कि लगातार तीसरे महीने खुदरा महंगाई दर भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI के अनुमान से ज्यादा रही है। इससे घरेलू बजट पर दबाव बढ़ने की चिंता भी बढ़ गई है।
अगस्त में महंगाई बढ़ने के पीछे सबसे बड़ा असर खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी का माना जा रहा है। सब्जियों, खासकर आलू और प्याज के दामों में बढ़ोतरी ने घर के महीने भर के खर्च को प्रभावित किया है। बाजार में सब्जियों की कीमतें बढ़ने से परिवारों को रोजमर्रा की खरीदारी के लिए पहले की तुलना में ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ रहा है।
महंगाई का असर केवल रसोई तक सीमित नहीं है। खाने-पीने की चीजों की कीमत बढ़ने के साथ दूसरी जरूरी वस्तुओं और सेवाओं की लागत भी आम उपभोक्ताओं के बजट को प्रभावित करती है। लगातार तीन महीनों तक RBI के अनुमान से ऊपर रहने वाली महंगाई दर नीति निर्माताओं के लिए भी चिंता का विषय बन सकती है।
महंगाई बढ़ने का सीधा असर लोगों की खरीदारी क्षमता पर पड़ता है। खासकर मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों को खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी का ज्यादा सामना करना पड़ता है। अब सबकी नजर आने वाले महीनों में सब्जियों और अन्य खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर रहेगी। अगर कीमतों में राहत मिलती है तो महंगाई पर दबाव कम हो सकता है, लेकिन दाम लगातार ऊंचे बने रहे तो घरेलू खर्च पर दबाव और बढ़ सकता है।
