देश : देश की राजनीति और शिक्षा जगत में शनिवार को बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला, जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। NEET पेपर लीक मामले को लेकर लगातार बढ़ते विरोध और 36 दिनों से जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के बीच यह फैसला सामने आया। इस्तीफे के तुरंत बाद शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को सौंप दी गई। प्रह्लाद जोशी पहले से ही खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण, ऊर्जा और उपभोक्ता मामलों जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
नई जिम्मेदारी मिलने के बाद प्रह्लाद जोशी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे देश की उम्मीदों पर पूरी तरह खरा उतरने का प्रयास करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत की शिक्षा व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण सुधार हुए हैं और इन सुधारों को आगे बढ़ाना उनकी प्राथमिकता होगी। दूसरी ओर, धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे के साथ जारी दो पन्नों की चिट्ठी में युवाओं को भ्रमित किए जाने का उल्लेख किया और शिक्षा सुधारों का भी जिक्र किया।
इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके ने इसे आंदोलन की बड़ी जीत बताया। उन्होंने कहा कि कई लोगों का कहना था कि इस सरकार में कोई मंत्री इस्तीफा नहीं देता, लेकिन लगातार संघर्ष और जनदबाव ने यह साबित कर दिया कि लोकतंत्र में जनता की आवाज सुनी जाती है। उन्होंने अपने समर्थकों का भी आभार जताते हुए आंदोलन को आगे भी जारी रखने की बात कही।
बताया जा रहा है कि 2014 में पहली बार मोदी सरकार बनने के बाद विरोध प्रदर्शन के दबाव में किसी केंद्रीय मंत्री के इस्तीफा देने का यह पहला मामला माना जा रहा है। इससे पहले 2018 में विदेश राज्य मंत्री एम.जे. अकबर ने भी इस्तीफा दिया था, लेकिन वह मामला अलग परिस्थितियों से जुड़ा था। फिलहाल धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और प्रह्लाद जोशी की नियुक्ति को लेकर देशभर में राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि नई शिक्षा नेतृत्व टीम छात्रों का भरोसा दोबारा कैसे मजबूत करती है और शिक्षा व्यवस्था में आगे क्या बड़े फैसले लिए जाते हैं।
