लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 12 साल पुराने पशुधन प्रसार अधिकारी भर्ती घोटाले में आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने रिटायर्ड IAS अधिकारी और तत्कालीन प्रमुख सचिव योगेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। उन्हें बुधवार सुबह लखनऊ के गोमती नगर स्थित उनके आवास से हिरासत में लिया गया। आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान नियमों में बदलाव कर चयन में गड़बड़ी की गई थी।
2014 में हुई थी 1,198 पदों पर भर्ती
यह मामला वर्ष 2014 का है, जब प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी। उस दौरान पशुधन विभाग में 1,198 पशुधन प्रसार अधिकारी पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई थी। परीक्षा 2 फरवरी 2014 को आयोजित हुई थी, जिसमें 1,005 अभ्यर्थियों का चयन कर उन्हें प्रशिक्षण देने के बाद नियुक्तियां दी गईं।
उस समय योगेश कुमार पशुधन विभाग में प्रमुख सचिव के पद पर तैनात थे। भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप लगने के बाद मामला अदालत पहुंचा। 34 अभ्यर्थियों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल कर लिखित परीक्षा और इंटरव्यू में गड़बड़ी का आरोप लगाया था।
OMR शीट की जांच में हेरफेर का आरोप
EOW की जांच के मुताबिक, भर्ती प्रक्रिया में नियुक्तियां मंडल स्तर पर होनी थीं, लेकिन OMR शीट को जांच के लिए विभागीय मुख्यालय मंगा लिया गया। आरोप है कि इस व्यवस्था के जरिए अंकों में हेरफेर कर कुछ अपात्र अभ्यर्थियों को फायदा पहुंचाया गया और पात्र अभ्यर्थियों को नुकसान हुआ।
जांच में यह भी सामने आया कि मंडलीय चयन समितियों के अधिकारों में बदलाव किया गया था। OMR शीट की जांच की जिम्मेदारी रायबरेली स्थित फिरोज गांधी इंस्टीट्यूट को सौंपी गई थी। जांच एजेंसी के अनुसार, संस्थान के पास इस तरह की जांच का पर्याप्त अनुभव नहीं था।
हाईकोर्ट के आदेश पर शुरू हुई थी जांच
भर्ती में अनियमितताओं की शिकायतों के बाद 17 दिसंबर 2017 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर मामले की जांच विशेष जांच दल (SIT) को सौंपी गई। SIT ने वर्ष 2018 में अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपते हुए कई अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की थी।
इसके बाद वर्ष 2019 में तत्कालीन निदेशक चरण सिंह यादव को निलंबित किया गया। 29 जुलाई 2021 को इस मामले में 28 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई। जांच एजेंसियों ने भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों और परीक्षा आयोजित कराने वाली संस्था की भूमिका की भी पड़ताल की।
अब तक 25 लोगों की गिरफ्तारी का दावा
EOW के अधिकारियों के मुताबिक, मामले में अब तक 25 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं। जांच के दौरान तत्कालीन पशुधन विकास मंत्री राजकिशोर सिंह की भूमिका भी जांच के दायरे में आई थी। EOW के अनुसार, उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई अभियोजन की मंजूरी मिलने के बाद की जा सकती है।
भर्ती अब तक नहीं हुई निरस्त
इस मामले में कथित अनियमितताओं के बावजूद भर्ती प्रक्रिया अब तक निरस्त नहीं की गई है। चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्तियां दी गई थीं और उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वे अब भी नौकरी कर रहे हैं।
रिटायर्ड प्रमुख सचिव योगेश कुमार की गिरफ्तारी को उत्तर प्रदेश में वरिष्ठ नौकरशाही से जुड़े मामलों में बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। अब जांच एजेंसी की आगे की कार्रवाई और मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका पर नजर रहेगी।
