नई दिल्ली: भारत में कचरा प्रबंधन को और प्रभावी बनाने के लिए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 27 जनवरी 2026 को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 अधिसूचित किए हैं जो आज से लागू हो गए है। नए नियम पुराने 2016 के नियमों की जगह लेंगे। संसद में केंद्रीय मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने बताया कि तेजी से बढ़ती आबादी और शहरीकरण के कारण कचरे की मात्रा लगातार बढ़ रही है। अगर इसे सही तरीके से प्रबंधित नहीं किया गया तो यह पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों के लिए खतरा बन सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए नए नियम बनाए गए हैं, जिनका फोकस कचरे को कम करना, उसे अलग करना और ज्यादा से ज्यादा रीसाइक्लिंग करना है।नए नियमों के तहत हर नागरिक के लिए यह अनिवार्य होगा कि वह अपने घर या कार्यस्थल पर ही कचरे को चार हिस्सों में अलग करे जैस- गीला कचरा, सूखा कचरा, सैनेटरी कचरा और विशेष देखभाल कचरा। गीले कचरे में रसोई से निकलने वाला कचरा जैसे सब्जियों के छिलके, बचा हुआ खाना और फल शामिल होते हैं, जिन्हें आसानी से खाद में बदला जा सकता है। सूखा कचरा जैसे प्लास्टिक, कागज, कांच और धातु को अलग रखकर रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जाएगा। सैनेटरी कचरा में डायपर, सैनिटरी पैड और मेडिकल उपयोग की चीजें आती हैं, जिन्हें अलग पैक करके देना जरूरी होगा। वहीं, ई-वेस्ट, बैटरी, केमिकल और बल्ब जैसे खतरनाक कचरे को विशेष देखभाल कचरे में रखा गया है, जिसे सामान्य कचरे में मिलाना पूरी तरह मना होगा।नए नियमों में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कचरा प्रबंधन की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल किया जा रहा है।
