संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एस०जी०पी०जी०आई०), लखनऊ का 29वाँ दीक्षांत समारोह संपन्न

लखनऊ: राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाध्यक्ष आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एस०जी०पी०जी०आई०), लखनऊ का 29वाँ दीक्षांत समारोह सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर राज्यपाल  ने शिक्षार्थियों को कुल 415 उपाधियाँ प्रदान कीं तथा सभी उपाधियों को डिजिलॉकर में अपलोड किया। साथ ही उन्होंने जनपद रायबरेली के आंगनबाड़ी केंद्रों हेतु 300 आंगनबाड़ी किटों का भी वितरण किया। राज्यपाल ने सभी उपाधि प्राप्तकर्ताओं को हार्दिक बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और कहा कि विद्यार्थियों को जीवन में आगे बढ़ते हुए सदैव समाज और देश की सेवा के प्रति समर्पित रहना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि हर विद्यार्थी के माता-पिता और अभिभावकों ने उन्हें यहां तक पहुंचाने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है, इसलिए उनका सम्मान करना प्रत्येक उपाधिधारक का प्रथम कर्तव्य होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि शिक्षा का सबसे बड़ा उद्देश्य राष्ट्र निर्माण और समाज सेवा से जुड़ा है।  राज्यपाल ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त की कि राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क-2025 में संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान ने देश के चिकित्सा संस्थानों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए सातवें स्थान से छलांग लगाकर पाँचवाँ स्थान प्राप्त किया है। वर्ष 2024 में संस्थान को नैक मूल्यांकन में ए प्लस प्लस मान्यता प्राप्त होना भी एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों और राज्य विश्वविद्यालयों की परिस्थितियाँ व संसाधन भिन्न होते हैं, फिर भी राज्य विश्वविद्यालय सीमित सुविधाओं में सराहनीय कार्य कर रहे हैं। राज्यपाल ने संस्थान को प्रेरित करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि विश्वविद्यालय राष्ट्रीय स्तर से आगे बढ़कर विश्व रैंकिंग में भी अपना परचम लहराए।

उन्होंने कहा कि गुणवत्ता पर सतत ध्यान देना चाहिए, अपनी कमियों को पहचानकर उन्हें दूर करने का प्रयास करना चाहिए और समाज सेवा से जुड़कर शिक्षा एवं अनुसंधान का सफर आगे बढ़ाना चाहिए। उन्होंने बताया कि आज राज्य के 7 विश्वविद्यालय एशिया रैंकिंग में भी स्थान प्राप्त कर चुके हैं, जो गर्व का विषय है। राज्यपाल  ने चिकित्सकों से संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि किसी भी संस्थान का निर्माण प्रायः किसानों की भूमि पर होता है। ऐसे में जब कोई किसान, बुजुर्ग, महिला या बच्चा इलाज के लिए आए तो उसका उपचार पूरे मन से करें, सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार करें और कभी भी किसी मरीज को निराश न लौटाएँ। प्रत्येक मरीज को तात्कालिक सुविधा और त्वरित इलाज मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि डॉक्टर तभी अपनी भूमिका का सही निर्वहन कर पाएंगे जब उनमें संवेदनशीलता और मानवीयता का भाव होगा। राज्यपाल ने आगे कहा कि देश को स्वस्थ बनाने के लिए विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं पर ध्यान देना होगा। शत-प्रतिशत डिलीवरी अस्पतालों में हो, गर्भवती महिलाओं को अच्छा पोषण और अनुकूल वातावरण मिले, तभी स्वस्थ बच्चों का जन्म होगा और यही स्वस्थ समाज एवं राष्ट्र निर्माण का आधार बनेगा। उन्होंने अनुभव साझा करते हुए कहा कि जनपदों के भ्रमण के दौरान यह देखा जाता है कि गाँवों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी है। इसलिए यह नियम होना चाहिए कि हर डॉक्टर अपनी नौकरी के कम से कम तीन वर्ष गाँव में रहकर ग्रामीण अंचलों की सेवा करे। किसानों ने अपनी भूमि संस्थान को दी है, इसलिए यह दायित्व है कि चिकित्सक उन्हीं ग्रामीणों की स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान दें।

 

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