रोज़ाना जरुरत के सामान और गैस के दाम बढे : थोक महंगाई भी अप्रैल में 8.30%, ईरान जंग का असर

 (नई दिल्ली) अप्रैल में थोक महंगाई (WPI) दोगुने से ज्यादा बढ़कर 8.30% पर पहुंच गई है। मार्च में यह 3.88% पर थी। अप्रैल में महंगाई 42 महीने में सबसे ज्यादा है। अक्टूबर 2022 में ये 8.39% पर पहुंच गई थी। कॉमर्स मिनिस्ट्री ने आज यानी 14 मई को थोक महंगाई के आंकड़े जारी किए हैं।

महंगाई बढ़ने की वजह रोजाना जरूरत की चीजें और फ्यूल के दाम बढ़ना है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। यह तनाव लंबा चला तो महंगाई आगे और बढ़ सकती है। इस तनाव के वजह से क्रूड ऑयल के दाम 100 डॉलर के पार पहुंच गए हैं।

रोजाना जरूरत के सामान, फ्यूल और पावर के दाम बढ़े –

  • रोजाना की जरूरत वाले सामानों (प्राइमरी आर्टिकल्स) की महंगाई 6.36% से बढ़कर 9.17% हो गई।
  • खाने-पीने की चीजों (फूड इंडेक्स) की महंगाई 1.85% से बढ़कर 1.98% पर पहुंच गई है।
  • फ्यूल और पावर की थोक महंगाई दर 1.05% से बढ़कर 24.71% हो गई है।
  • मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स की थोक महंगाई दर 3.39% से बढ़कर 4.62% रही।

    होलसेल की  महंगाई के 4 हिस्से –

    प्राइमरी आर्टिकल, जिसका वेटेज 22.62% है। फ्यूल एंड पावर का वेटेज 13.15% और मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट का वेटेज सबसे ज्यादा 64.23% है। प्राइमरी आर्टिकल के भी चार हिस्से हैं।

    • फूड आर्टिकल्स जैसे अनाज, गेहूं, सब्जियां
    • नॉन फूड आर्टिकल में ऑयल सीड आते हैं
    • मिनरल्स
    • क्रूड पेट्रोलियम


      रिटेल की  महंगाई अप्रैल में बढ़कर 3.48% पर पहुंची – 

      अप्रैल की रिटेल महंगाई बढ़कर 3.48% पर पहुंच गई है। इससे पहले मार्च में यह 3.40% थी। महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह खाने-पीने की चीजों के दामों का बढ़ना है। फूड इन्फ्लेशन अप्रैल में बढ़कर 4.20% पर पहुंच गई। मार्च में यह आंकड़ा 3.87% था।

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