दिल्ली: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच आमतौर पर यह उम्मीद की जाती है कि सोना और चांदी जैसी कीमती धातुओं की कीमतों में तेजी आएगी। इतिहास गवाह है कि जब भी दुनिया में युद्ध, आर्थिक संकट या राजनीतिक अस्थिरता बढ़ती है, निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोने और चांदी की ओर रुख करते हैं। लेकिन इस बार तस्वीर कुछ अलग दिखाई दे रही है। 8 जून को सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिसने निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों दोनों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 24 कैरेट सोने की कीमत 3,470 रुपये प्रति 10 ग्राम गिरकर करीब 1.51 लाख रुपये पर आ गई है। वहीं चांदी की कीमत में भी भारी गिरावट देखने को मिली है और यह 15,748 रुपये प्रति किलो टूटकर 2.41 लाख रुपये पर पहुंच गई है। सिर्फ जून के शुरुआती आठ दिनों में ही चांदी करीब 22 हजार रुपये प्रति किलो सस्ती हो चुकी है।
इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण निवेशकों की बदलती रणनीति मानी जा रही है। वैश्विक अनिश्चितता और युद्ध जैसे हालात के बीच लोग अपने निवेश को नकदी में बदलना अधिक सुरक्षित समझ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में कई बड़े निवेशक सोना और चांदी बेचकर कैश अपने पास रख रहे हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत उसका उपयोग किया जा सके। इसी वजह से बाजार में बिकवाली बढ़ी है और कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
इसके अलावा, जनवरी 2026 में सोना और चांदी दोनों ने रिकॉर्ड ऊंचाई हासिल की थी। सोना 1.76 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 3.86 लाख रुपये प्रति किलो के ऑलटाइम हाई तक पहुंच गई थी। ऐसे में कई निवेशकों ने ऊंचे स्तर पर मुनाफावसूली यानी प्रॉफिट बुकिंग शुरू कर दी। बाजार में बढ़ी सप्लाई भी कीमतों में गिरावट का एक बड़ा कारण बनी।
हालांकि, जानकारों का मानना है कि सोना और चांदी की कीमतों का भविष्य काफी हद तक वैश्विक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगा। यदि भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ता है तो बाजार में फिर से सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ सकती है। वहीं यदि निवेशक नकदी को प्राथमिकता देते रहे, तो कीमतों पर दबाव कुछ समय तक जारी रह सकता है।
फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि सोना और चांदी के बाजार में चल रही यह असामान्य गिरावट निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है कि वैश्विक परिस्थितियां किस तरह निवेश के पारंपरिक नियमों को भी बदल सकती हैं।
