आम आदमी पार्टी उत्तर प्रदेश के मुख्य प्रदेश प्रवक्ता वंशराज दुबे ने ऊर्जा मंत्री एके शर्मा और पावर कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष के बीच सार्वजनिक रूप से सामने आए विवाद को योगी सरकार की प्रशासनिक विफलता, भ्रष्टाचार और अफसरशाही के वर्चस्व का सबसे बड़ा प्रमाण बताते हुए कहा कि जब प्रदेश का ऊर्जा मंत्री अपने ही विभाग में हो रही कथित अनियमितताओं, जाति-धर्म के आधार पर भर्ती, अनुभवी कर्मचारियों की छंटनी और बिजली उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने जैसे मामलों में पत्र लिखकर गुहार लगाने को मजबूर हो जाए तो यह स्पष्ट हो जाता है कि उत्तर प्रदेश में लोकतांत्रिक सरकार नहीं बल्कि अफसरशाही का शासन चल रहा है। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार का पूरा मॉडल फेल हो चुका है और जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों को केवल शोपीस बनाकर रखा गया है।

वंशराज दुबे ने कहा कि मीडिया में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने स्वयं पावर कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि निगम में जाति और धर्म के आधार पर फैसले लिए जा रहे हैं, अनुभवी कर्मचारियों को हटाया जा रहा है और उनकी जगह अकुशल लोगों की नियुक्तियां की जा रही हैं। मंत्री ने यह भी लिखा कि कई बार निर्देश देने के बावजूद उनकी बात नहीं मानी गई। इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या हो सकता है कि प्रदेश का एक कैबिनेट मंत्री अपने ही विभाग में असहाय दिखाई दे रहा है।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार अब “डबल इंजन” नहीं बल्कि “डबल कंट्रोल” वाली सरकार बन गई है, जहां एक तरफ मंत्री हैं और दूसरी तरफ सर्वशक्तिमान अफसर। फर्क सिर्फ इतना है कि निर्णय अफसर लेते हैं और जवाब जनता के सामने मंत्री देते हैं। ऊर्जा मंत्री के पत्र ने साबित कर दिया है कि उत्तर प्रदेश में वास्तविक सत्ता चुने हुए प्रतिनिधियों के पास नहीं बल्कि कुछ प्रभावशाली अधिकारियों के हाथों में सिमट गई है।
वंशराज दुबे ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेश में रामराज्य का दावा करते हैं, लेकिन ऊर्जा मंत्री की बेबसी ने उस दावे की सच्चाई उजागर कर दी है। सवाल यह है कि सरकार में बड़ी किसकी है—मंत्री की कुर्सी या अफसर की कलम? यदि मंत्री के आदेशों का पालन नहीं हो रहा, यदि उनकी आपत्तियों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है, तो फिर सरकार चल कौन रहा है? यह स्थिति लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बेहद चिंताजनक है।
उन्होंने कहा कि सबसे शर्मनाक तथ्य यह है कि ऊर्जा मंत्री को बिजली उपभोक्ताओं पर लगाए गए 10 प्रतिशत अतिरिक्त फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज की जानकारी भी विभाग से नहीं बल्कि मीडिया रिपोर्टों के माध्यम से मिली। यह किसी हास्य व्यंग्य का विषय नहीं बल्कि शासन व्यवस्था की गंभीर विफलता है। जिस मंत्री के हस्ताक्षर से विभाग चलता है, उसे अपने ही विभाग के महत्वपूर्ण निर्णय अखबार और टीवी देखकर पता चलें, इससे बड़ी प्रशासनिक अराजकता और क्या हो सकती है। भाजपा सरकार को बताना चाहिए कि आखिर विभाग मंत्री चला रहे हैं या अखबार?
वंशराज दुबे ने कहा कि यदि ऊर्जा मंत्री के आरोप सही हैं तो बिजली विभाग में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद, मनमानी और सत्ता का दुरुपयोग हो रहा है। यदि आरोप गलत हैं तो मुख्यमंत्री को तत्काल स्पष्ट करना चाहिए कि उनका मंत्री प्रदेश की जनता के सामने ऐसे गंभीर आरोप क्यों लगा रहा है। दोनों ही स्थितियों में सरकार की साख और विश्वसनीयता पूरी तरह कटघरे में खड़ी है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता पहले से महंगी बिजली, बार-बार होने वाली कटौती और खराब विद्युत व्यवस्था से परेशान है। लेकिन सरकार जनता की समस्याएं हल करने के बजाय आपसी खींचतान, सत्ता संघर्ष और विभागीय लड़ाई में उलझी हुई है। इसका सीधा नुकसान प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं को उठाना पड़ रहा है।
अंत में वंशराज दुबे ने मांग की कि ऊर्जा मंत्री द्वारा लगाए गए सभी आरोपों की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए, पावर कॉर्पोरेशन में भर्ती, छंटनी और वित्तीय निर्णयों की समीक्षा की जाए तथा प्रदेश की जनता को बताया जाए कि आखिर उत्तर प्रदेश में सरकार कौन चला रहा है। उन्होंने कहा कि यह डबल इंजन की सरकार नहीं, बल्कि ‘अफ़सरों की सरकार’ है जहां जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों का कोई वजूद नहीं बचा है। अंतर्कलह और भ्रष्टाचार में डूबी यह सरकार उत्तर प्रदेश की जनता को लूटने का काम कर रही है।
