श्री श्री राधा रमण बिहारी मंदिर (इस्कॉन), लखनऊ भक्तवृंद द्वारा हरिनाम संकीर्तन एवं प्रवचन (कथा) का आयोजन मोहान रोड, लखनऊ स्थित आनंद उत्सव लॉन मे किया गया, जिसमे मन्दिर अध्यक्ष एवं मुख्य वक्ता के रूप में अपरिमेय श्याम प्रभुजी ने श्रीमद भगवत गीता के अनुरूप विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करते हुये क्रमशः आध्यात्मिक एवं भौतिक उदाहरण देते हुये सरलतम शब्दों में समझाया कि “हम शरीर नहीं आत्मा हैं” “अच्छे लोगों के साथ बुरा क्यों होता है?” “भगवान कौन है?” “मैं कौन हूं?” “भगवान से हमारा क्या सम्बन्ध है। 
साथ ही पुरुषोत्तस मास पर विशेष चर्चा करते हुये अपरिमेय श्याम प्रभु ने बताया कि पुरुषोत्तम मास, जिसे मलमास या अधिक मास भी कहा जाता है, जो तीन वर्ष बाद आता है और भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है तथा स्वयं भगवान ने इसे सभी मासों में श्रेष्ठ घोषित किया है। इस मास में किया गया जप, तप, दान एवं भक्ति सेवा का फल हजारों गुना अधिक प्राप्त होता है।
अपरिमेय श्याम प्रभु ने यह भी बताया कि पुरुषोत्तम मास मे प्रतिदिन प्रातः एवं सायं दीपदान करते के साथ-साथ श्रीमद भागवत महापुराण के दशम स्कन्द के 14वें अध्याय एवं श्रीमद भगवत गीता के 15वें अध्याय पुरुषोत्तम योग एवं चौराष्ट्रकम को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर चिंतन करते हुये उसमे दी गयी शिक्षाओं के अनुरूप जीवन जीने का प्रयास करना चाहिए l यदि संभव हो तो धाम की यात्राएँ करते हुये उनमे निवास कर अधिक से अधिक नाम जप करना चाहिए ।

हरिनाम संकीर्तन एवं प्रवचन मे मोहान रोड, लखनऊ के साथ-साथ लखनऊ के विभिन्न क्षेत्रों से आये गणमान्य भक्तों ने श्रीकृष्ण भगवान के भजन, कीर्तन, नृत्य तथा दिव्य प्रसादम का आनंद उठाया।
