लखनऊ ट्रिपल मर्डर केस: सात मांगों पर सहमति के बाद हुआ अंतिम संस्कार

Lucknow: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। सआदतगंज इलाके में एक ही परिवार के तीन लोगों की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई। मृतकों में सेवानिवृत्त कर्मचारी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व पदाधिकारी शिवाजी तिवारी, उनके बेटे सुयश तिवारी और भाई शिवेंद्र तिवारी उर्फ शंभू शामिल हैं।

इस घटना के बाद परिवार में मातम पसरा है, वहीं स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला। परिजनों ने आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई, आर्थिक सहायता, सरकारी नौकरी और सुरक्षा समेत सात मांगें प्रशासन के सामने रखीं। परिवार का कहना था कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार की ओर से ठोस आश्वासन नहीं मिलेगा, तब तक अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।

मामले में उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक के हस्तक्षेप के बाद परिवार को मांगों पर सहमति का आश्वासन दिया गया। इसके बाद तीनों मृतकों का अंतिम संस्कार किया गया।

दरअसल, यह मामला लखनऊ के सआदतगंज थाना क्षेत्र के ब्राह्मणी टोला और नौबस्ता इलाके का है। सोमवार, 26 अक्टूबर की सुबह करीब साढ़े दस बजे कार पार्किंग और खाली जमीन के इस्तेमाल को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद हुआ। देखते ही देखते विवाद ने हिंसक रूप ले लिया और गोलीबारी में तीन लोगों की जान चली गई।

पुलिस और समाचार एजेंसियों की शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक, शिवाजी तिवारी, उनके भाई शिवेंद्र तिवारी और बेटे सुयश तिवारी को गोली लगने के बाद केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, जहां तीनों की मौत हो गई। पुलिस ने घटनास्थल से कथित तौर पर वारदात में इस्तेमाल पिस्तौल और कारतूस बरामद किए। मुख्य आरोपी को मौके पर ही हिरासत में लिए जाने की जानकारी भी सामने आई थी। मामले में आगे की जांच शुरू की गई।

तीनों मृतकों के शव पोस्टमार्टम के बाद जब घर पहुंचे, तो परिवार के लोगों के साथ बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक और आरएसएस के स्वयंसेवक एकत्र हो गए। माहौल गमगीन था और परिवार आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा था।

परिजनों का कहना था कि परिवार के तीन सदस्यों की हत्या के मामले में केवल गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं है। दोषियों को कड़ी सजा दिलाने के साथ ही परिवार को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा भी दी जानी चाहिए।

इसी मांग को लेकर परिवार ने सात बिंदुओं वाला मांगपत्र प्रशासन के सामने रखा। अधिकारियों ने परिवार से बातचीत की, लेकिन परिजन उपमुख्यमंत्री के स्वयं आने और सरकार की ओर से स्पष्ट आश्वासन मिलने पर अड़े रहे।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे। उनके साथ भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष नीरज सिंह और अन्य पार्टी पदाधिकारियों की मौजूदगी की जानकारी सामने आई। परिवार से बातचीत के दौरान मांगों पर सरकार की सहमति और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया गया।

उपमुख्यमंत्री की ओर से मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाने और आरोपियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी एनएसए के तहत कार्रवाई की संभावना का आश्वासन दिया गया। साथ ही पीड़ित परिवार की आर्थिक मदद, मृतक की बेटी की शिक्षा और परिवार की महिला सदस्य को सरकारी नौकरी दिलाने जैसे मुद्दों पर भी सहमति की बात कही गई।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि एनएसए के तहत कार्रवाई, सरकारी नौकरी, मुआवजे और अन्य मांगों के संबंध में अंतिम सरकारी आदेश तथा कानूनी प्रक्रिया की स्थिति की अलग से पुष्टि की जानी चाहिए।

परिवार की ओर से रखी गई मांगों में आरोपियों के खिलाफ एनएसए के तहत कार्रवाई और फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई प्रमुख हैं। इसके अलावा मृतक शिवेंद्र तिवारी की बेटी की पढ़ाई का खर्च सरकार द्वारा उठाने, उनकी पत्नी रुचि तिवारी को नगर निगम में ओएसडी पद पर सरकारी नौकरी देने और मृतकों के दोनों परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग शामिल बताई गई।

परिवार ने आरोपियों के कथित अवैध कब्जे वाले निर्माण पर बुलडोजर कार्रवाई, मृतक की पत्नी को शस्त्र लाइसेंस देने और संबंधित थाना व चौकी के जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी रखी।

इन मांगों पर सरकार की सहमति का आश्वासन मिलने के बाद परिवार ने अंतिम संस्कार की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। उपमुख्यमंत्री ने अर्थी को कंधा दिया और गुलाला घाट पर अंतिम संस्कार में शामिल हुए।

लखनऊ का यह मामला अब सिर्फ तीन लोगों की हत्या तक सीमित नहीं रह गया है। इसने स्थानीय विवादों को समय रहते सुलझाने, पुलिस की जवाबदेही और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने जैसे गंभीर सवाल भी खड़े किए हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जांच कितनी तेजी से आगे बढ़ती है, आरोपियों के खिलाफ कानून के मुताबिक क्या कार्रवाई होती है और पीड़ित परिवार को दिए गए आश्वासन कब तक धरातल पर उतरते हैं। परिवार को न्याय दिलाने के लिए निष्पक्ष जांच और अदालत में मजबूत पैरवी बेहद जरूरी होगी।

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