दिल्ली: मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव अब सीधे सैन्य कार्रवाई तक पहुंच गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी सेंटकॉम ने दावा किया है कि उसकी सेना ने ईरान के गोरुक और केश्म द्वीप पर मौजूद रडार साइट्स को निशाना बनाकर हमला किया है। अमेरिकी सेना के मुताबिक होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में पहले ईरान के चार अटैक ड्रोन मार गिराए गए और उसके बाद आगे के संभावित हमलों को रोकने के लिए रडार ठिकानों पर कार्रवाई की गई।
अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने होर्मुज स्ट्रेट के आसपास दुश्मन ठिकानों पर मिसाइल हमले करने का दावा किया है। वहीं सेंटकॉम के अनुसार ईरान ने कुवैत और बहरीन की दिशा में सात बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इनमें से छह मिसाइलों को हवा में ही इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया गया, जबकि सातवीं मिसाइल अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकी।
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि हालिया अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की मिसाइल क्षमता बुरी तरह कमजोर हो चुकी है और उसके पास केवल 21 से 22 प्रतिशत मिसाइल शक्ति ही बची है। हालांकि अमेरिकी मीडिया संस्थान न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट इससे अलग तस्वीर पेश करती है। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का मानना है कि ईरान अपनी 33 में से 30 मिसाइल साइट्स को दोबारा सक्रिय कर चुका है और उसके पास अब भी करीब 70 प्रतिशत मिसाइल भंडार मौजूद है।
उधर लेबनान में इजराइली हमले जारी हैं, जबकि अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर भी बातचीत चल रही है। रिपोर्टों के मुताबिक ईरान ने अपनी फ्रीज की गई 24 अरब डॉलर की संपत्ति जारी करने की मांग रखी है। ऐसे में पूरी दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या यह संकट कूटनीतिक समाधान की ओर बढ़ेगा या फिर क्षेत्र में संघर्ष और गहरा होगा।
