पाकिस्तान: खैबर पख्तूनख्वा में बादल फटने से 20 बच्चे समेत 385 की मौत

नई दिल्ली: पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में बादल फटने से आई बाढ़ में मरने वालों की संख्या अब तक कुल 385 हो गयी है। मृतकों में 20 बच्चे भी शामिल हैं। बादल फटने के कारण बुनेरा जिला सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। बुनेरा में बादल फटने के कारण 200 लोगों की मौत हुई है। आपदा प्रभावित इलाकों में बाढ़ से भारी नुकसान हुआ है।

इलाके में राहत और बचाव कार्य जारी है। लापता लोगों की तलाश की जा रही है। दूसरी ओर पाकिस्तान में जारी भीषण मानसूनी बारिश ने तबाही मचा दी है। देशभर में बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं में सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जून के अंत से अब तक बारिश से जुड़ी घटनाओं में कम से कम 657 लोगों की मौत हो गई है और करीब 1,000 लोग घायल हुए हैं।

सोमवार को अकेले 400 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि की गई, जिनमें अधिकतर मामले बन्नू, स्वात, शंगला, बाजौर, पाकिस्तान अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान (पीओजीबी) और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) से सामने आए। बारिश और बाढ़ से दर्जनों घर बह गए, गांवों में अंतिम संस्कार खुले मैदानों में होने लगे और पहाड़ी घाटियों में मातम छा गया।

इस त्रासदी ने एक बार फिर पाकिस्तान की जलवायु परिवर्तन के प्रति संवेदनशीलता और संस्थागत तैयारियों की कमी को उजागर कर दिया है। यह बात पाकिस्तान ऑब्जर्वर में प्रकाशित शोधार्थी ज़फ़र ख़ान सफ़दर के लेख में सामने आई। खैबर पख्तूनख्वा (के-पी) प्रांत में सबसे अधिक जनहानि हुई, जहां बीते 15 वर्षों में सरकार ने महज नारेबाजी और वादों के सिवा कुछ ठोस कदम नहीं उठाए।

रिपोर्ट में दावा किया गया कि पाकिस्तान का बहुचर्चित “बिलियन ट्री सुनामी प्रोजेक्ट” एक बड़े घोटाले के रूप में सामने आया है। इसमें न तो वादे के मुताबिक पेड़ लगाए गए, न भूमि का सही उपयोग हुआ, बल्कि अरबों रुपये की हेराफेरी हुई और स्वात व दिर की पहाड़ियां अब भी उजड़ी पड़ी हैं। सोमवार को के-पी के स्वाबी जिले में ही 17 लोगों की मौत हो गई। यहां बादल फटने से दर्जनभर घर डूब गए और भूस्खलन ने कई बस्तियों को निगल लिया।

 

 

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