प्रबल प्रताप के मामले में CJI ने दिया ये जवाब

सुप्रीम कोर्ट में हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने सभी को हैरान कर दिया। कोर्ट की कार्यवाही के दौरान एक शख्स ने न सिर्फ देश के मुख्य न्यायाधीश यानी CJI के लिए अपशब्द कहे, बल्कि जजों को आदेश देने की भी कोशिश की। अब इस पूरे विवाद पर CJI सूर्यकांत ने अपनी चुप्पी तोड़ी है।पत्रकारों से बातचीत में CJI सूर्यकांत ने कहा कि इस घटना को ज्यादा तूल नहीं दिया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, “युवा कभी-कभी ऐसी हरकतें कर देते हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि देश की सभी संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा और सम्मान बनाए रखा जाए।दरअसल, 10 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान इलाहाबाद के एक वकील और याचिकाकर्ता प्रबल प्रताप ने कोर्ट में हंगामा कर दिया। उन्होंने खुद को “सर्वोच्च शासक” बताया और सुप्रीम कोर्ट के जजों को “न्यायिक सेवक” कहकर संबोधित किया।

प्रबल प्रताप ने कहा, “मैं आपको आदेश देता हूं कि लखनऊ के एएसपी के खिलाफ साइबर अपराध गिरोह चलाने के आरोप में एफआईआर दर्ज की जाए।”
इस पर हैरान जस्टिस के.वी. विश्वनाथन ने पूछा, “क्या आप हमें आदेश दे रहे हैं?” लेकिन इसके बाद भी याचिकाकर्ता नहीं रुका और उसने CJI के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते हुए कोर्ट रूम में कागज फेंक दिए।

स्थिति बिगड़ने पर सुरक्षाकर्मियों ने उसे कोर्ट से बाहर निकाल दिया। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने उसके खिलाफ अवमानना या किसी अन्य दंडात्मक कार्रवाई का रास्ता नहीं चुना। अदालत ने कहा कि वह व्यक्ति काफी परेशान और हताश दिखाई दे रहा था और उसके प्रति सहानुभूति रखी जानी चाहिए।वहीं, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि अदालत की गरिमा का हर हाल में सम्मान होना चाहिए और न्यायिक कार्यवाही में किसी भी तरह का दुर्व्यवहार या बाधा न्याय व्यवस्था पर सीधा हमला है।

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