NSE का बड़ा फैसला: कैश और F&O मार्केट होंगे एकसाथ, 3:40 बजे तक होगी डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग

बिज़नेस : देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज NSE ने निवेशकों और बाजार सहभागियों के लिए एक अहम बदलाव का ऐलान किया है। अब कैश और डेरिवेटिव्स यानी F&O मार्केट के बीच बेहतर तालमेल बनाने के लिए इक्विटी डेरिवेटिव्स की सामान्य ट्रेडिंग का समय बढ़ाकर दोपहर 3:40 बजे तक कर दिया गया है। यह फैसला कैश सेगमेंट में नए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन यानी CAS को लागू करने के तहत लिया गया है। एक्सचेंज का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य बाजार के क्लोजिंग प्राइस को अधिक पारदर्शी और सटीक बनाना है, ताकि कैश और डेरिवेटिव्स दोनों सेगमेंट में एक जैसी प्रक्रिया अपनाई जा सके।

NSE ने साफ किया है कि केवल मार्केट क्लोजिंग टाइम में बदलाव किया गया है। प्री-ओपन सेशन और ट्रेड मॉडिफिकेशन विंडो जैसी अन्य ट्रेडिंग टाइमिंग्स पहले की तरह ही रहेंगी। नए सिस्टम के तहत क्लोजिंग ऑक्शन सेशन दिन के आखिर में आयोजित होगा, जहां निवेशक खरीद और बिक्री के ऑर्डर देकर किसी शेयर का निष्पक्ष क्लोजिंग प्राइस तय करने में भाग लेंगे। इससे बाजार में प्राइस डिस्कवरी बेहतर होगी और क्लोजिंग के समय पारदर्शिता बढ़ेगी।

एक्सचेंज ने यह भी बताया कि स्टॉक फ्यूचर्स की ऑपरेटिंग प्राइस रेंज में किसी भी बदलाव की स्थिति में नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा। यदि किसी निवेशक के ऑर्डर नई प्राइस रेंज से बाहर होंगे तो वे स्वतः रद्द हो जाएंगे। हालांकि डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स के क्लोजिंग प्राइस निकालने के तरीके में कोई बदलाव नहीं किया गया है। अब केवल VWAP यानी वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस की गणना दोपहर 3:10 बजे से 3:40 बजे के बीच हुए ट्रेड्स के आधार पर होगी।

NSE ने ब्रोकर्स को सलाह दी है कि वे अपने ट्रेडिंग सिस्टम और कॉन्ट्रैक्ट फाइलों को समय रहते अपडेट कर लें। इन बदलावों की टेस्टिंग आगामी मॉक ट्रेडिंग सेशन में की जाएगी। SEBI के निर्देशों के अनुसार इस नई व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। शुरुआती चरण में केवल उन्हीं शेयरों पर क्लोजिंग ऑक्शन लागू होगा जिनके डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट उपलब्ध हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से भारतीय शेयर बाजार की कार्यप्रणाली अंतरराष्ट्रीय मानकों के और करीब पहुंचेगी तथा निवेशकों को अधिक भरोसेमंद और पारदर्शी ट्रेडिंग अनुभव मिलेगा।

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